युवाओं को लुभाने डिजाइनर खादी मैदान में
फरीदाबाद. गांधी की खादी अब डिजाइनर्स के दम पर आकर्षक व नए अंदाज में युवाओं को लुभाने के लिए मैदान में आ गई है। खादी ग्रामोद्योग ने पहली बार रेडीमेड कपड़ों की कई किस्में मैदान में उतारी हैं। इन सबसे हटकर पहली बार मैदान में उतरी खादी की जींस धूम मचाने को तैयार है।
इससे पहले जींस का यह कपड़ा हरियाणा में नहीं मिलता था। इसे मुंबई या राजस्थान से मंगाया जाता था। यह सब खादी को और अधिक लोकप्रिय बनाने और लोगांे की डिमांड को ध्यान में रखकर किया गया है। ये रेडीमेड कपड़े युवाओं से लेकर बुजुर्गो को खूब लुभा रहे हैं।
खादी ग्रामोद्योग की राज्यस्तरीय प्रदर्शनी में ऐसे रेडीमेड कपड़ों की कई किस्में मौजूद हैं। इस प्रदर्शनी में 35 ग्रामोद्योग की व 70 खादी की स्टॉल लगी हुईं हैं। जिन पर छूट के साथ सामान बेचा जा रहा है। आज मार्केट में विदेशी रेडिमेड कपड़ों का बाजार पैर जमा चुका है।
मार्केट में रेडिमेड कपड़ों के देशी व विदेशी ब्रांडस की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। लोग कपड़े सिलवाने में अब अधिक रूचि नहीं दिखा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए खादी ग्रामोद्योग ने भी रेडिमेड कपड़ों की कई किस्मों के साथ प्रदर्शनी लगाई हुई है।
क्या-क्या शामिल हैं रेडिमेड में
इनमें पैंट, शर्ट, कुर्ता, पायजामा, जैकेट, कोट, लेडिज सूट व बच्चे से लेकर बुजुर्र्गे के पहने जाने वाले सभी प्रकार के कपड़े रेडिमेड उपलब्ध हैं। इन रेडिमेड कपड़ों की कीमत 250 रुपए से लेकर दो हजार रुपए तक है। इसके अलावा इन सब से हटकर खादी ग्रामोद्योग ने जींस का कपड़ा भी रखा हुआ है।
रेडिमेड कपड़ों पर डिजाइन के लिए खादी ग्रामोद्योग ने 15 बेहतरीन डिजाईनों को नियुक्त किया हुआ है, जो एक से बढ़कर एक कलाकारी इन कपड़ों पर दिखा रहे हैं। इस तरह के डिजाईन से इन कपड़ों की लुक काफी अच्छी दिखाई दे रही है।
नौ साल से बढ़ रही है सेल
फरीदाबाद जिले में राज्यस्तरीय खादी प्रदर्शनी की शुरूआत 2001 में हुई थी। इसके बाद से लगातार यहां पर सेल में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2008 में जहां प्रदर्शनी की सेल दो करोड़ के लगभग थी, वहीं 2007 में डेढ़ करोड़, 2006 में सवा करोड़, 2005 में 90 लाख रुपए के लगभग थी। प्रदर्शनी के इंचार्ज नीरज कुमार के अनुसार खादी की सेल बढ़ रही है।
क्या कहते हैं दुकानदार
समालखा से रेडिमेड कपड़ों की स्टॉल लगाने वाले पहलसिंह, कुरूक्षेत्र से बलवीर सिंह, रामअवतार गुर्जर व नारनौल से आए चरखा मिस्त्री रामगोपाल आदि ने बताया कि यहां पर हर साल उनकी सेल बढ़ रही है। और लोगों का खादी उत्पादों केप्रति रूझान भी देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि खादी ग्रामोद्योग चाहता है किएक ही छत के नीचे सभी प्रकार के उत्पाद आसानी से लोगांे को उपलब्ध हो जाएं।
क्या कहते हैं ग्रामोद्योग के इंचार्ज
खादी ग्रामोद्योग के इंचार्ज नीरज कुमार ने बताया कि युवाओं की पसंद को ध्यान में रखकर रेडिमेड कपड़ों की सूचि लंबी की गई है। उनको इस बात की खुशी है किलोगों का रूझान खादी की तरफ बढ़ रहा है, इसलिए यहां पर हर साल सेल बढ़ जाती है। यहां पर रोजाना दो से ढाई हजार लोग प्रदर्शनी में आ रहे हैं। इस बार उनको पूरी उम्मीद है कि पिछली बार से अधिक की सेल होगी।
कहां-कहां से आते हैं दुकानदार
खादी ग्रामोउद्योग की इस प्रदर्शनी में दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरिद्वार, देहरादून मुंबई व हरियाणा में पानीपत, कुरूक्षेत्र, जींद, नारनौल, करनाल व अन्य कई जगहों से दुकानदार यहां पर स्टॉल लगाते हैं।











