अब भारत-पाक में मध्यस्थता पर अमेरिका से सफाई की उम्मीद
जिनेवा. भारत-पाकिस्तान विवाद में तीसरे पक्ष की भूमिका को लेकर चीन की ओर से सफाई के बाद अब वाशिंगटन की बारी है कि वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यात्रा के मौके पर आश्वस्त करे कि उसकी भी ऐसी कोई मंशा नहीं थी।
दोनों नेताओं के बीच व्हाइट हाउस के ओवल आफिस में 24 नवंबर को होने वाली बहुप्रचारित बैठक का रुख इसी से तय होगा। यह बैठक मुंबई हमले की बरसी के ऐन पहले होने जा रही है। पाकिस्तान को लेकर भारतीय पक्ष के प्रति चीन के सम्मानजनक रुख से प्रधानमंत्री के शिष्टमंडल का हौसला बढ़ा है। व्हाइट हाउस में बदले हुए माहौल में पीएम के साथ जा रही टीम के सदस्यों की बॉडी लेंग्वेज में भी आत्मविश्वास झलकने लगा है। सिंह इस मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को भारत आने का औपचारिक न्योता दे सकते हैं और ओबामा की ओर से इसे स्वीकार किए जाने की पूरी संभावना है।
परमाणु करार
दोनों नेताओं के बीच बातचीत के दौरान वैसे तो विभिन्न विषय आएंगे, लेकिन भारत का खास जोर असैन्य परमाणु करार के जल्दी से जल्दी अमल पर रहेगा। अमेरिका को इस मामले में बताया जाएगा कि भारत ने परमाणु करार को लागू करने के लिए अप्रत्याशित तेजी के साथ काम किया है। ओबामा के पूर्ववर्ती जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच परमाणु करार पर दस्तखत किए गए थे। भारत के पक्ष को अच्छी तरह समझने के बाद काफी संभावना इस बात की है कि अमेरिका परमाणु अप्रसार संधि का मामला न उठाए।
अफगानिस्तान
जहां तक अमेरिका का सवाल है वह भारत से अफगानिस्तान में स्थिरता कायम करने में अधिक भूमिका और भागीदारी की अपेक्षा कर सकता है। ओबामा पर वहां से सेनाएं वापस बुलाने के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है और वाशिंगटन चाहता है कि भारत वहां उसके हित देखे।
हालांकि माना जाता है कि भारत ने उसे साफ बता दिया है कि उसकी सैनिक दृष्टि से अफगानिस्तान मामले से जुड़ने की कोई मंशा नहीं है। भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उसकी नजरों में तालिबान में ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ तालिबान जैसा कोई भेद नहीं है। अमेरिका में एक वर्ग है जो मानता है कि ‘अच्छे’ तालिबान को प्रशासनिक मामलों को लेकर बातचीत की प्रक्रिया से जोड़ा जा सकता है।
मुंबई हमला
दोनों देशों के बीच वार्ता में मुंबई हमला और आईएसआई की भूमिका का मसला भी आ सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका मुंबई हमलों में शामिल आईएसआई के लोगों के नाम बता सकता है। ऐसा अनुमान भी है कि सैनिक सहयोग बढ़ाने को लेकर भी चर्चा की जा सकती है। भारत द्वारा बड़े पैमाने पर रक्षा खरीदी किसी से छिपी नहीं है और अमेरिका, देश की जरूरतों को पूरा करने में अधिक भूमिका निभाने में दिलचस्पी रखता है। दोनों देशों के बीच पहले ही काफी सैनिक सहयोग हो रहा है।
पहले राजकीय अतिथि
सिंह ओबामा प्रशासन में राजकीय अतिथि का दर्जा हासिल करने जा रहे पहले विदेशी मेहमान होंगे। इस यात्रा के बाद प्रधानमंत्री पोर्ट आफ स्पेन में 27 से 29 नवंबर तक आयोजित होने वाली राष्ट्रमंडल शिखर वार्ता में भाग लेने के लिए त्रिनिदाद और टोबैगो जायेंगे।
चीन-भारत की भूमिका अहम
वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता राबर्ट वुड ने कहा कि विश्व में भारत व चीन की भूमिका बहुत अहम है, इसलिए अमेरिका इन दोनों देशों के साथ व्यापक बातचीत कर रहा है। वुड के मुताबिक, आने वाले समय में भारत व चीन के साथ अमेरिका करीबी सहयोग करेगा।










