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Sunday, Nov 22nd, 2009, 2:21 am [IST]  

danik bhaskarसरस्वती के लिए उठे हाथ

Bhaskar Correspondent

कुरुक्षेत्र. ‘सरस्वती नदी एक परिदृश्य पर आयोजित अधिवेशन में सरकार, समाज और संतों ने एक सुर से इसे पुनर्जीवित करने पर जोर दिया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आरके सदन में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन का उदघाटन वित्त एवं सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने किया।



उन्होंने कहा कि हमारे वेदों में सरस्वती नदी का उल्लेख आता है कि यह सभी सात नदियों की माता है। इस नदी को पुनर्जीवित करने में दादूपुर नलवी नहर बहुत मदद करेगी। जहां सरकारी तंत्र अपना कार्य कर रहा है, वहीं पर जनता का सहयोग भी सराहनीय है। जिस किसी किसान की जमीन इस दैविक नदी के रास्ते में आई उसने स्वयं ही जगह खाली कर प्रशासन को सौंप दी।



इस नदी के धरती के नीचे बहने के बारे में किवदंतियांे को इसरो वैज्ञानिकों के द्वारा पता लगाया गया तथा इसके प्रवाह के बारे में पता चला। इस नदी की पुण्यधारा के धरती पर अवतरण होते ही जनमानस को जल का एक नया स्रोत प्राप्त होगा। नदी को ढूंढने में ओएनजीसी के वैज्ञानिकों ने धरती के नीचे बहते जल को भी ढूंढ निकाला।



जब ये वैज्ञानिक राजस्थान के जैसलमेर के पास तेल की खोज के लिए कार्य कर रहे थे, तब वहां उन्होंने तेज गति से बहने वाली जलधारा का पता लगाया। जिससे राजस्थान सरकार ने कहा कि पहले इस जल का ही सदपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शोध संस्थान के वैज्ञानिकों को कलायत में भी बह रही जलधारा का पता चला है।



प्राचीनकाल में भी इस नदी के धरती पर प्रवाहित के प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने कहा कि जनमानस की भावनाओं को देखते हुए जीटी रोड पिपली के निकट इस पवित्र नदी में मिलने वाले सीवरेज के पानी की अलग निकासी के लिए अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं।



इस अवसर पर सरस्वती नदी शोध संस्थान के अध्यक्ष दर्शनलाल जैन ने कहा कि इस सपने को साकार करने में उन्होंने जब भी किसी संस्था या व्यक्ति से संपर्क साधा तो उनका हर कार्य बिना किसी विघन के सरस्वती माता की कृपा से बनता चला गया। कांची कामकोटी पीठम् से जगत गुरु जयेंद्र सरस्वती ने कहा कि भारत में सरस्वती की धार्मिक दृष्टि से भी बहुत महता रही है।



इस नदी के किनारे वेदों व पुराणों की रचना की गई। इसके तट पर प्राचीन भारतीय सभ्यता फली फूली। इसी के पावन तट पर भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता का उपदेश अजरुन को दिया था। इस लिए यदि ये धरती पर बहती है तो हमारा सौभागय होगा। स्वामीगल शुकरताल से स्वामी ओमानंद जी सरस्वती, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति ले.जनरल डा. डीडीएस संधू ने भी अपने विचार प्रकट किए।

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