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Sunday, Nov 22nd, 2009, 2:25 am [IST]  

danik bhaskarबनाई एकता की रंगोली

Bhaskar Correspondent

kurukshetraकुरुक्षेत्र. कुरुक्षेत्र उत्सव दिन बीतने के साथ निखर रहा है। ब्रम्हसरोवर पर लगा राष्ट्रीय शिल्प मेला चौथे दिन शनिवार को पूरे रंग में नजर आया। शनिवार को हजारों लोगों ने शिल्प मेले का भ्रमण किया और शिल्प को सराहा। खास बात यह रही कि अभी भी शिल्पकारों यहां पहुंचना जारी है।



शनिवार को नागालैंड व महाराष्ट्र से शिल्पकार अपने शिल्प के प्रदर्शन को पहुंचे। दिनभर मेले में दर्शकों की भीड़ रही। लोगों ने हाथ से बनी शिल्प कलाकृतियों की जमकर खरीददारी की। किसी को ड्राई फ्लावर पसंद आए तो किसी को पीतल से बनी मूर्तियां। कोई जूट से बने सामान को पसंद कर रहा है तो बनारसी साडियों और खादी के वस्त्रों की भी खूब बिक्री हो रही है।



इन सुंदर शिल्प कलाकृतियों की कीमत कोई मायने नहीं रखती। फरीदाबाद से रेड स्टोन से बनी सुंदर कलाकृतियां लेकर पहुंचे दीपक बताते हैं कि रोजाना आठ से दस हजार रुपए की बिक्री हो रही है। पिछले शिल्प मेले में उनकी कुल बिक्री 50 हजार रुपए थी, इस बार इससे दोगुनी होने की उम्मीद है। नागालैंड से हार्थ ड्राई फ्लावर के बने सामान को लेकर आई अप्पू व देवी बताती हैं कि वे पहली मर्तबा यहां आए हैं। पहले दिन उन्हें अच्छा रिस्पांस मिला है।



10 से लेकर एक लाखों रुपए तक का सामान



शिल्प मेले में इस बार दस रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक का सामान बिक्री व प्रदर्शन को पहुंचा है। इसमें जूट व चमड़े का सामान, लोहे, रेड स्टोन, चीनी मिट्टी, हैंडलूम, आर्टिफिशियल ज्वैलरी, लोहे व मिट्टी के बने खिलौने और सजावट की वस्तुएं, पीतल की मूर्तियां, पटियाला जूती, हैंड एंब्रोडरी, रोट आयरन, चंबा की मशहूर जूती, कश्मीर की पसमीना से बनी शाल, पंजाब की फुलकारी आदि को खूब पसंद किया जा रहा है।



कालबेलिया व धमाली ने मचाया धमाल



कुरुक्षेत्र उत्सव के चौथे दिन भी रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों की खूब भीड़ खींची। तालियों की गडगडाहट से ब्रम्हसरोवर दिनभर गूंजता रहा। शनिवार को विभिन्न राज्यों से कलाकारों के नए ग्रुप पहुंचे। जबकि पुराने ग्रुप यहां से वापस लौट गए। शनिवार को कश्मीर के लोक कलाकारों ने धमाली लोकनृत्यों से खूब तालियां बटोरी।



वहीं राजस्थानी कलाकारों ने कालबेलिया नृत्य से दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। पंजाब के कलाकारों ने जिंदवा, सम्मी, भांगडा व गिद्दा प्रस्तुत किया। हिमाचल के कलाकारों ने कल्लू नाटी नामक लोक नृत्य और उतराखंड से आए कलाकारों ने हारुल की प्रस्तुति से मन मोहा। मंच संचालन कर रहे गुरदर्शन सिंह ने बताया कि 12 दिवसीय इस उत्सव में दो दो दिन के लिए कलाकारों को आमंत्रित किया है। दो दिन बाद दूसरे राज्यों की टीमों को प्रस्तुति का मौका दिया जा रहा है।

कल से दिखेंगे रंगोली के रंग



कुरुक्षेत्र उत्सव में हालांकि रंगोली प्रदर्शनी इस बार शिल्प मेले के साथ शुरू नहीं हो पाई, लेकिन इस बार रंगोली का अंदाज जुदा होगा। एनजेडसीसी के सहायक प्रोग्राम आफिसर राजेश कुमार बस्सी के मुताबिक इस बार उत्सव में महाराष्ट्र के अलावा तिब्बती की रंगोली खास आकर्षण होगी। रंगोली बनाने के लिए कलाकार पहुंच चुके हैं। ब्रम्हसरोवर की उत्तरी परिक्रमा में रंगोली प्रदर्शनी के लिए स्थान बनाया गया है। जिसमें दिनरात कलाकार रंगोली बनाने में लगे हैं। 23 नवंबर से रंगोली का प्रदर्शन शुरू होगा।

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