मुलाजिमों की कमी, कैसे होगी सुरक्षा
प्रवीन अरोड़ा . करनाल
लोगों की सुरक्षा व कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए जिलेभर में 11 थाने और 17 पुलिस चौकी स्थापित की गईं हैं, लेकिन इन चौकी और थानों में पुलिस कर्मियों की संख्या आबादी के हिसाब से बहुत कम है। कई बार घटना होने के बाद संबंधित थाने या चौकी की पुलिस काफी देर से पहुंच पाती है। जो जवान थाने व चौकियों में हैैं उनके कंधों पर न केवल लोगों की सुरक्षा व कानून व्यवस्था बनाए रखने का जिम्मा है, बल्कि इन्हीं को जिला मुख्यालय रिपोर्ट करने व न्यायालय संबंधी कार्य भी करने की जिम्मेदारी है।
एरिया बड़ा, कर्मचारी कम : जिला शहरी क्षेत्र के थानों में 45 से 50 पुलिसकर्मी तैनात हैं, जबकि ग्र्रामीण क्षेत्र के थानों में 30 से 35 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैैं। इन पुलिस कर्मियों के कंधों पर काफी लंबे एरिया की सुरक्षा का जिम्मा है। इन थानों के अधीन आने वाली चौकियों में पांच से आठ मुलाजिम होते हैं। इनमें से एक मुंशी, एक इंचार्ज और एक राइडर हैं, जबकि एक मुलाजिम को हेडक्वार्टर व कोर्ट आदि संबंधी कार्य के लिए भी जाना पड़ता है। एक चौकी के अधीन 10 से 15 गांव का एरिया भी पड़ता है। ऐसे में यदि कोई बड़ी घटना हो जाती है तो चौकी के स्तर से सिर्फ थाने पर सूचना दी जा सकती है इससे अधिक कुछ भी कर पानी उनके लिए संभव नहीं है।
नहीं है टेलीफोन कनेक्शन : जिले की कई पुलिस चौकियों में टेलीफोन का लैंडलाइन कनेक्शन तक नहीं है। ऐसे में इमरजेंसी में लोगों को चौकी में जाकर संपर्क करना पड़ता है। शहर की बस स्टैंड चौकी, बल्ला, सालवन, सेक्टर-नौ की चौकी में अभी तक टेलीफोन का लैंडलाइन कनेक्शन तक नहीं है। चौकी में टेलीफोन न होने से पुलिस अधिकारियों को भी चौकी कर्मियों के मोबाइल फोन पर संपर्क करना पड़ता है।










