पंजाबियों से राफ्ता, केपी करेंगे पदयात्रा
जालंधर. पंजाबियों से नजदीकी रिश्ता कायम रखने की कवायद के चलते कांग्रेस राज्य में पदयात्रा निकालेगी। सांसद एवं पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मौजूदा प्रधान मोहिंदर सिंह केपी के नेतृत्व में पदयात्रा पंजाब के माझा, मालवा और दोआबा क्षेत्र से होकर गुजरेगी।
यात्रा के दौरान केंद्र की यूएपी सरकार की तरफ से चलाई जा रही जन कल्याण योजनाओं का गुणगान तो होगा ही, साथ ही में कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भी ग्राउंड तैयार करेगी।
खास यह कि पदयात्रा की सफलता राज्य में केपी के पैर मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है। आजादी के शहीदों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए कांग्रेस की पदयात्रा शहीद-ए-आजम भगत सिंह के शहीदी स्मारक हुसैनीवाला (फिरोजपुर) से शुरू होगी और जिला भगत सिंह नगर (नवांशहर) स्थित शहीद भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़कलां में ही इसे विराम दिया जाएगा।
पदयात्रा की शुरुआत 28 फरवरी से होगी और शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस के मौके पर 23 मार्च को संपन्न होगी। पदयात्रा के लिए कांग्रेस हाईकमान से भी अनुमति ले ली गई है।
मोहिंदर सिंह केपी ने पदयात्रा की पुष्टि करते हुए कहा है कि यात्रा का उद्देश्य प्रत्येक पंजाबी को यूपीए की नरेगा (राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार सुरक्षा अधिनियम) जैसी कल्याणकारी एवं रोजगारपारक योजनाओं के बारे जानकारी देना है।
लोगों को कांग्रेस की नीतियों से भी अवगत करवाया जाएगा। यात्रा के दौरान कई कांग्रेसी दिग्गज भी भाग लेंगे। बकौल केपी अभी इस यात्रा में लगभग तीन माह का समय शेष बचा है और निर्धारित कार्यक्रम में कुछेक तबदीलियां भी की जा सकती हैं, लेकिन मौजूदा समय में तो यही कार्यक्रम बनाया गया है।
पदयात्रा दे सकती है कूटनीति को निमंत्रण !
कांग्रेस हाईकमान तो यात्रा के जरिए पंजाब में संगठन की स्थिति को मजबूत करना चाहती है, लेकिन यात्रा केपी केभविष्य की भी ग्राउंड तैयार करेगी। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कार्यकाल के आखिर में आकर विकास यात्रा निकाली थी।
चुनावों से ठीक पहले निकाली गई इस यात्रा में भीड़ इकट्ठी करने के बावजूद विधानसभा चुनावों में अपेक्षाकृत जीत नहीं मिल सकी थी और दिग्गज भी औंधे मुंह गिरे थे।
पद्यात्रा के दौरान अगर तो कैप्टन गुट ने अपना सहयोग दिया तो ठीक है, वर्ना भट्ठल गुट को एक बार फिर हाईकमान को कैप्टन गुट की शिकायत करने का मौका मिल जाएगा। भट्ठल गुट में अहम स्थान रखने वाले केपी भी अपनी पहचान को मजबूत दिखाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे।











