शहर और नेताओं की छवि, दोनों साफ हों
जयपुर. निकायचुनाव में अध्यक्ष, सभापति और मेयर की साफ छवि के साथ सफाई व सीवरेज के इंतजाम में कोताही अब भी बड़े मुद्दे हैं। नागरिकों का मानना है कि निकायों की बदहाली और अनदेखी के कारण गंदगी के अंबार लगे हैं, सीवरेज सिस्टम नहीं है, जहां है वहां हालत खराब है।
लोग इसलिए भी खफा हैं कि निकाय सफाई जैसे मूलभूत काम को करने में भी नाकाम है। सफाई के बाद नागरिक निकायों में व्याप्त भ्रष्टाचार से परेशान हैं, उनका मानना है कि यदि निकायों में नीचे से लेकर ऊपर तक व्याप्त भ्रष्टाचार आधा भी हो जाए तो लोगों की दिक्कतें कम हो सकती हैं।
जयपुर, जोधपुर जैसे महानगर ही नहीं, छोटे शहरों के नागरिक भी निकायों की बदलती भूमिका से बखूबी वाकिफ हैं। वे मानते हैं कि ढांचागत विकास और शहर की शक्ल बदलने में निकाय अब अहम हो गए हैं, संभागीय मुख्यालयों के बाद छोटे शहरों में राजस्थान शहरी ढांचागत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के माध्यम से जो काम करवाए जा रहे हैं, उनका संचालन शहरी निकायों को ही करना है।
‘भास्कर’ की पहल पर जनता का घोषणा पत्र बनाने की प्रक्रिया में कई रोचक और मूलभूत मुद्दे उभरकर आए। नागरिकों का मानना है कि जनप्रतिनिधि ईमानदार हों और मतदाताओं से जुड़ाव रखें तो शहरों की काफी समस्याएं दूर हो सकती हैं। जनआंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए संघर्ष करने वाले जयपुर के वरिष्ठ नागरिक पीएन मैंदौला का कहना है कि नगर निगम में जनप्रतिनिधि की बजाए जनभागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
नगर पालिका एक्ट में जनभागीदारी के लिए वार्ड समितियों की व्यवस्था है लेकिन पार्षद अपने चहेतों को ही इन समितियों में शामिल करते हैं। राज्य के जोधपुर जैसे शहर के 70 फीसदी लोग गंदगी को सबसे बड़ी समस्या मानते हैं और 80 फीसदी नागरिकों का मानना है कि सफाई व्यवस्था सुधारना महापौर की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
ट्रैफिक व्यवस्था, खास तौर पर पार्किग की समस्या सुलझाने में नगरीय निकायों की निष्क्रियता से भी नागरिक खफा हैं। कोटा निवासी राजेश शर्मा कहते हैं कि जब शहर बढ़ता है तो नगर की सर्वोच्च संस्था होने के नाते नगर निगम की भूमिका भी बढ़ जाती है, उसे नई भूमिका के अनुरूप काम करने की आदत डालनी चाहिए। ऐसा ही कुछ मानना है, उदयपुर के नागरिकों का। उदयपुर के 25 फीसदी नागरिक मानते हैं कि निगम को झीलों के संरक्षण में अहम भूमिका निभानी चाहिए। बीकानेर के नागरिकों के लिए रेलवे फाटक बड़ी समस्या है, 70 फीसदी मानते हैं कि निगम को ओवरब्रिज बनाने की पहल करनी चाहिए।
ऐसे हुआ सर्वे
दैनिक भास्कर ने निकाय चुनावों में मतदाताओं की रायशुमारी से जनता का घोषणा पत्र तैयार करने के लिए अखबार में सर्वे पत्र प्रकाशित किया, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने भरकर भेजा। शहरों में, गांवों में 100 से ज्यादा टॉक शो किए। इससे जो राय उभरकर आई, उसी आधार पर बना जनता का घोषणा पत्र।
प्रदेशभर के 20 हजार से अधिक नागरिकों को घोषणा पत्र बनाने की प्रक्रिया में शामिल किया गया। यही नहीं, मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों को मतदाताओं से रू—ब—रू कराया, सीधे सवाल कराए और मौके पर ही जवाब भी दिलवाए गए। यह भास्कर की अनूठी पहल थी जो पाठकों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को फिर पुख्ता करती है।











