बच्चों के साथ झूमे ब्रिटिश शिक्षक
चंडीगढ़. भारत दौरे पर आए ब्रिटिश शिक्षकों की एक टीम ने शनिवार को जवाहर नवोदय विद्यालय-25 के विद्यार्थियों से मुलाकात की। उनके स्वागत के लिए स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
विद्यार्थियों ने हिमाचली, पंजाबी व गढ़वाली लोकगीतों के जरिये भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई तो विदेशी मेहमान भी उनके साथ झूमने लगे। टीम के कोऑर्डिनेटर डॉरिक एलिस ने कहा कि भारत सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बहुत धनी है।
इस मौके पर रसेल वेब, ग्लोरिया जॉन्स, जॉन डेवी, ग्राहम लुईस और जॉनाथम डेविस भी उनके साथ थे। ब्रिटिश शिक्षकों ने क्लास रूम, कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, आर्ट रूम व हॉस्टल देखे और बच्चों को मिलने वाले भोजन का स्वाद भी लिया। ग्राहम लुईस ने बच्चों की किताबें देखीं और उनके साथ काफी देर बातचीत की।
रसेल वेब ने बच्चों से कुछ सवाल पूछे। ग्लोरिया जॉन्स ने कहा कि चंडीगढ़ बहुत सुंदर शहर है और भारत काफी विकसित हो चुका है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान—प्रदान कार्यक्रम यूकेरी (यूनाइटेड किंगडम एजूकेशनल एंड रिसर्च इनिशिएटिव) के तहत छह दिवसीय दौरे पर आई यह टीम रविवार को जम्मूकश्मीर में विद्यार्थियों से मिलेगी।
द ब्रिटिश स्कूल में वर्कशॉप: पंचकूला. सेक्टर -8 स्थित द ब्रिटिश स्कूल में शनिवार को सकारात्मक अनुशासन पर वर्कशॉप आयोजित की गई। अमेरिका के नॉर्थ केरोलिना से पहुंची व्यवहार विशेषज्ञ सुजेन स्मिथा ने वर्कशॉप में सकारात्मक अनुशासन पर रोचक जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में अनुशासन के प्रति पहले से ही एक सकारात्मक भाव होना चाहिए। सुजेन ने अनेक उदाहरणों के माध्यम से अनुशासन से जुड़ी बातों को समझाया। सुजेन ने कहा कि जिस तरह का व्यवहार आप अपने बच्चों से चाहते हैं वैसा खुद भी करें।
समस्याओं के समाधान खोजने के लिए ठंडे दिमाग से काम लें। उन्होंने कहा कि बच्चों ध्यान बंटाकर गलत काम करने से रोका जा सकता है। बच्चों को पॉकेट मनी भी दें ताकि वे पैसे को सही प्रकार से रखना- सीख सकें। स्कूल के डायरेक्टर संजय सेठी ने बताया कि वे अपने स्कूल में आत्मअनुशासन पर जोर देते हैं और इसी कड़ी में इस कार्यशाला को आयोजित किया गया।










