डॉक्टर को भारी पड़ी कोर्ट की अवमानना
पानीपत. ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट इन चीफ आरके वाट्स की अदालत में शनिवार को एक सरकारी डाक्टर को अदालत की अवमानना करना भारी पड़ गया। अदालत ने डाक्टर को भारतीय दंड संहिता की धारा 228 के तहत नोटिस थमा दिया। यही नहीं, न्यायाधीश के आदेश के बाद डाक्टर को लगभग 5 घंटे तक पुलिस कस्टडी में भी रखा गया।
जानकारी के अनुसार शनिवार को मेडिकल ऑफिसर आलोक जैन की आरके वाट्स की अदालत में गवाही थी। डा. जैन सुबह लगभग 10 बजे ही अदालत पहुंच गए। अदालत में पहुंचने के बाद डाक्टर ने नायब कोर्ट जोगेंद्र सिंह को सरकारी वकील को बुलाकर लाने के लिए कहा। इसके बाद जैसे ही न्यायाधीश आरके वाट्स ने अपनी कुर्सी संभाली, उसी समय डा. जैन ने उन्हें जल्दी काम निपटा कर फारिग करने को कहा।
इस पर न्यायाधीश ने डा. जैन को बदतमीजी से पेश न आने की चेतावनी दी। इस पर डाक्टर और न्यायाधीश के बीच बहस बढ़ती गई। इसके बाद न्यायाधीश आरके वाट्स ने डाक्टर को भारतीय दंड संहिता की धारा 228 के तहत नोटिस जारी करने तथा पुलिस कस्टडी में लिए जाने के आदेश दे दिए। इस कार्रवाई के तहत डा. आलोक जैन लगभग 2:30 बजे तक अदालत में पुलिस कस्टडी के बीच रहे। डाक्टर द्वारा माफी मांगने के बाद ही न्यायाधीश ने डा. आलोक जैन को जाने दिया।
छह माह की होती है सजा
धारा 228 के तहत अदालती कार्रवाई में बाधा डालना तथा अदालत की अवमानना जैसा अपराध शामिल किया जाता है। इसके तहत आरोपी को छह माह की सजा तथा एक हजार रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है।
सीएमओ को भेजा नोटिस
डाक्टर आलोक जैन के व्यवहार को लेकर न्यायाधीश आरके वाट्स ने सीएमओ को भी नोटिस भेजा है। नोटिस में न्यायाधीश ने सीएमओ से इस विषय में उचित कार्रवाई करने की बात कही है।
कोर्ट में चर्चा का विषय
डाक्टर और जज की बहस पूरा दिन वकीलों में चर्चा का विषय रही। वकीलों ने न्यायाधीश आरके वाट्स द्वारा उठाए गए कदम को सराहनीय बताया। वकीलों का कहना था कि इस तरह के कार्यो से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है तथा कानून के सबसे ऊंचा होने वाली बात भी प्रमाणित होती है।










