बेटी ने अपने बूते पर जीता मोर्चा
आसन(रोहतक). नौसेना के लड़ाकू हवाई इकाई में शामिल होने वाली लेफ्टिनेंट अंबिका हुड्डा का शनिवार को घर पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। उनकी उपलब्धि पर उनके पैतृक गांव आसन के लोग काफी खुश हैं। करीब छह माह बाद लौटी अंबिका डोर्नियर विमान पर बतौर एविएटर नेवल आब्जर्वर एवं तकनीशियन की सेवाएं देंगी।
अंबिका का कहना है ‘नौसेना में मुझे कुछ कर दिखाने का मौका मिला है। देश सेवा करते हुए जिस दिन बहादुरी पुरस्कार मिलेगा, समझूंगी पिता का सपना साकार किया।’ अपनी और अलीगढ़ की सीमा रानी शर्मा की ऐतिहासिक उपलब्धि पर कहा, ‘यह तो शुरुआत है। सेना में लड़कियों के लिए असीम संभावनाएं हैं। इसमें वे कॅरियर बनाने के साथ देश सेवा भी कर सकती हैं।’
मां कृष्णा व पिता जय किशन हुड्डा ने बताया कि कक्षा में हमेशा टॉप आने वाली अंबिका ने बिना उनकी सलाह लिए नौसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के लिए फार्म भरा। उन्हें तो इसका पता तब चला जब परीक्षा के लिए बुलावा आया। स्क्रीनिंग में देश भर से 1200 लड़कियां शामिल हुईं जिनमें करीब 30 फीसदी ही चुनी गईं। सात दिन तक चली एसएसबी में सिर्फ तीन लड़कियां ही चुनी गईं।
चार पीढ़ियां फौज में
अंबिका के परिवार की तीन पीढ़ियों ने फौज में रहकर देश की सेवा की है। वे उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। पोती की उपलब्धि पर उनके दादा कंवल सिंह (80) गर्व से कहते हैं कि अंबिका ने ऐसा मुकाम हासिल किया है जिसके लिए लोग तरसते हैं। पोती के जज्बे ने उनका भी हौंसला बढ़ा दिया है।
बकौल कंवल उनका परिवार आजादी के पहले से ही देश सेवा कर रहा है। उनके पिता छाजूराम सेना में हवलदार थे और 1914 के युद्ध में अपना योगदान दिया। उनके भाई नायक कर्ण सिंह 1942 और चटगांव युद्ध लड़े। तीसरी पीढ़ी के रूप में उनके बेटे राममेहर हुड्डा नो 1971 में बांग्लादेश और चंद्रभान ने श्रीलंका शांति सेना में देश का प्रतिनिधित्व किया। बेटे जयकिशन व कुलदीप भी फौज में रह चुके हैं। अब चौथी पीढ़ी में पोती अंबिका के अलावा पोता सुनील सेना में सिपाही व पोती नीलम हुड्डा पायलट हैं। अंबिका के दादा का हौसला अभी भी देखते ही बनता है।
भाई अंतरराष्ट्रीय पहलवान
अंबिका के भाई राकेश हुड्डा अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान हैं। लगातार 12 बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुके राकेश को हरियाणा केसरी पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। एशियाड सहित दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कांस्य पदक जीत चुके हैं। अब उनकी निगाहें कॉमनवेल्थ खेलों पर है।
ऐसी बेटी सबको मिले
आज बेटियां किसी से कम नहीं हैं। उनकी ताकत के आगे आसमान भी घुटना टेकता है और जब ये बेटियां कुछ उपलब्धियां अर्जित करती हैं तो बाप का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। रोहतक की सब लेफ्टिनेंट बेटी ने नौसेना की लड़ाकू हवाई इकाई में शुमार होकर जो इतिहास रचा है, उससे एक बाप यही कह रहा है।
अब सीमा पर हमारी बेटियां भी बेटों के समान कंधे से कंधा मिलाकर देश सेवा करंेगी। एविएटर डोर्नियर विमान पर नेवल आब्जर्वर और टेक्टिशियन की कमान संभालने वाली आसन गांव की अंबिका हुड्डा के पिता जयकिशन हुड्डा व मां कृष्णा देवी इस समय गर्व से फूले नहीं समा रहे।
नौसेना में इस पद पर पहली महिला होने का खातिब हासिल करने पर इस परिवार में खुशियों की लहर दौड़ गई है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भास्कर प्रतिनिधि से बातचीत करते हुए फौज से सेवानिवृत्त पिता जयकिशन की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। अंबिका की उपलब्धि की खबर सुनकर रिश्तेदार, पड़ोसी व अन्य शहरवासी उनके घर पर बधाई देने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं।
उन्होंने पैसों की बजाय बच्चों को ज्यादा तवज्जो दी। बच्चों के कैरियर के लिए शहर में घर बनाना भी उचित नहीं समझा। उनके प्रयासों को बेटी ने सफल बना दिया है। - कृष्णा, अंबिका की मां।
पता था जरूर करेगी नाम रोशन
रोहतक की इंद्रप्रस्थ कालोनी में किराए के मकान में परिवार के साथ रह रहे अंबिका हुड्डा के पिता जयकिशन कहते हैं कि एक साधारण परिवार में जन्मी अंबिका ने हमेशा आगे बढ़ने की सोच रखी और हर कक्षा में बेहतरीन परफार्म्ेस दी। उन्हें इस बात का अहसास जरूर था कि वह जीवन में सफल जरूर होगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं सोचा था कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी के साथ जीवन की शुरूआत करेगी। यह अंबिका की कड़ी मेहनत का नतीजा है कि उसने जीवन में नया मुकाम हासिल किया है।










