अहमदाबाद की पिच ने खड़े किए सवाल
नई दिल्ली. श्रीलंका के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट मैच में मोटेरा की सपाट पिच से निराश ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि ऐसी सपाट पिचें टेस्ट क्रिकेट का अस्तित्व खत्म कर सकती हैं।
भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा भी इस पिच से नाखुशी जता चुके थे। अब पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली और संजय मांजरेकर की भी नकारात्मक टिप्पणी ने पिच के बारे में सवाल खड़े कर दिए हैं।
12 में से 7 मैच ड्रॉ : आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में खेले गए पिछले 12 टेस्ट मैचों में से 7 में परिणाम नहीं निकला। इन मैचों में एक तिहरा शतक, छह दोहरे शतक और 32 शतक लगे।
इस दौरान टीमों ने एक बार 700 और तीन-तीन बार 600 व 500 रन के आंकड़े पार किए। जाहिर है, ये आंकड़े गेंदबाजों के साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट के लिए भी उत्साहजनक नहीं हैं।
क्या हुआ मोटेरा में : मोटेरा की पिच पर पांच दिनों में 1598 रन बने। इनमें एक दोहरे शतक सहित सात शतक शामिल हैं। इस दौरान गेंदबाजों को सिर्फ 21 विकेट से संतोष करना पड़ा।
पिच बल्लेबाजों की ऐशगाह इस कदर थी, कि महान फिरकी गेंदबाज श्रीलंका के मुरलीधरन को तमाम प्रयासों के बावजूद मैच के आखिरी दिन एक भी विकेट नहीं मिला। आमतौर पर टेस्ट मैच के आखिरी दिन दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया की तेज पिचें भी टूटकर स्पिनरों को मदद करने लगती हैं।
ऐसे में मौजूदा व पूर्व क्रिकेटरों की पिच संबंधी चिंता जायज लगती है। ऐसे समय में जब फटाफट क्रिकेट की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, ड्रॉ मैच टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता कम ही करेंगे। जाहिर है, टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता बरकरार रखने के लिए जीवंत विकेट की जरूरत है।
‘टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता को बनाए रखने के लिए जीवंत विकेट की जरूरत है। मोटेरा जैसी पिचों से टेस्ट क्रिकेट को नुकसान ही होगा।’
सौरव गांगुली, पूर्व भारतीय कप्तान
‘ऐसी पिचें टेस्ट क्रिकेट को बर्बाद कर देंगी। यह बल्लेबाजों के लिए ‘फ्री टिकट’ जैसी स्थिति थी। गेंदबाजों के लिए इसमें कुछ भी नहीं था।’
हरभजन सिंह, टीम इंडिया के सदस्य
‘यदि हम ऐसी सपाट पिचों को अच्छी कहकर क्यूरेटरों को प्रोत्साहित करते रहेंगे, तो इससे टेस्ट क्रिकेट को बहुत नुकसान झेलना पड़ेगा।’
संजय मांजरेकर, पूर्व भारतीय क्रिकेटर










