नहीं चला मुरली का जादू
नई दिल्ली. श्रीलंका के ‘शो मैन’ मुथैया मुरलीधरन का बल्लेबाजों पर जादू कमजोर पड़ने लगा है। आंकड़े गवाह हैं कि हाल के समय में उनके विकेट लेने की रफ्तार में गिरावट आई है।
भारत के खिलाफ अहमदाबाद टेस्ट में मुरली कुल 63.5 ओवर में 221 रन देकर तीन विकेट ही हासिल कर पाए। दूसरी पारी में तो वे एक भी विकेट नहीं ले सके। दुनिया में सर्वाधिक 786 टेस्ट व 512 वनडे विकेट लेने वाले ऑफस्पिनर के कॅरियर में यह सातवां मौका है, जब वे दूसरी पारी में विकेटरहित रहे। वैसे, 20 ओवर गेंदबाजी करने के बाद उनके विकेट नहीं ले पाने का यह पहला मौका है।
2007 के बाद प्रदर्शन में गिरावट : आंकड़ों के अनुसार, 2007 के बाद से और खासकर विदेशी जमीन पर मुरली के प्रदर्शन में गिरावट आई है। हालांकि, इस अवधि में उन्होंने 20 टेस्टों में 26.51 की औसत से 112 विकेट लिए हैं। इनमें 9 बार एक पारी में 5 विकेट शामिल हैं।
सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि इन 112 विकेटों में से 39 तो उन्होंने नौसिखिए बांग्लादेश के खिलाफ 5 टेस्टों में झटके हैं। यदि इस आंकड़े को हटा दिया जाए तो इस दौरान उनका औसत 32.95 पहुंच जाता है। मुरली इस दौरान विदेशी जमीन पर 7 टेस्टों में 20 विकेट ही ले पाए हैं जिसका औसत 60 है।
दूसरी पारी में महंगे साबित हो रहे : इस अवधि में मुरली की दूसरी पारी में घातकता में भी कमी आई है। इस दौरान उन्होंने 17 दूसरी पारियों में 32 से अधिक की औसत से 43 विकेट लिए हैं, जो पहली पारी की उनकी औसत से 10 रन ज्यादा है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया में कमजोर प्रदर्शन : भारत में मुरली का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। अहमदाबाद टेस्ट के बाद भारत के खिलाफ उनका औसत 31.47 है। भारतीय जमीन पर वे अब तक 9 टेस्टों में 42.58 की औसत से 34 विकेट ही ले पाए हैं। ऑस्ट्रेलिया में तो वे 5 टेस्ट मैचों में 12 विकेट ही झटक सके हैं। उन्हें वहां हर विकेट की कीमत 75 से अधिक रन चुकानी पड़ी है।










