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Sunday, Nov 22nd, 2009, 10:57 pm [IST]  

danik bhaskarलोक नृत्यों से गुलजार हुआ शहर

भास्कर न्यूज & कुरुक्षेत्र

शिल्पमेला अपने पूरे शबाब पर है और ऐेसे में दर्शक भी मेले में काफी संख्या में आ रहे हैं। मेले में आने वाले दर्शक भले ही खरीदारी न करें लेकिन मंच पर आयोजित रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों को तालियों का तोहफा जरूर देकर जाते हैं। मेले को शुरू हुए पांच दिन हो गए हैं लिहाजा अब दर्शक भी इससे अछूते नहीं रहना चाहते। रविवार को छुट्टïी के दिन सुबह से ही ब्रह्मïसरोवर पर दर्शकों का तांता लगा रहा। वहीं कलाकारों ने भी पंजाबी भंगड़े, हिमाचली और उत्तराखंड के नृत्य के जरिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

कई स्टालों पर रही चहल-पहल

शिल्प मेले में फर्नीचर के स्टालों, चावल के दानों पर नाम लिखने वाले स्टालों और धार्मिक किताबों के स्टालों पर अधिक चहल-पहल रही। मेले में घूमने आई सीमा, अनिल, विजय, जोगिंद्र और पूनम का कहना था कि संडे के दिन वे घर से बाहर आकर एंजाय करना चाहते थे। इसलिए मेले की तरफ आए हैं इन सभी का कहना है कि मेले में खासतौर पर उन्हें कलाकारों का नृत्य बहुत पसंद आया। इसके अलावा लकड़ी का फर्नीचर की भी इन्होंने विशेष रूप से सराहना की। सीमा का कहना था कि वे यहां पर शापिंग का मन बनाकर आई हैं इसलिए वे कुछ स्टालों पर जाकर अपनी जरूरत की चीजों को खरीदेंगी।

कलाकारों ने बांधा समां

एक तरफ जहां लोग विभिन्न स्टालों पर लगे सामानों की जांच-परख करने में लगे थे वहीं दूसरी ओर स्टेजों पर कलाकार अपने लोकनृत्यों के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे थे। हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब और राजस्थान के कलाकारों ने अपने लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों से पूरा माहौल जमाए रखा। कलाकारों का कहना था कि उन्हें धर्मनगरी में आकर प्रस्तुति देना बेहद अच्छा लगता है। राजस्थान के कलाकारों ने कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति दी तो वहीं पंजाबी कलाकारों ने भंगड़े में जमकर धमाल मचाया। दूसरी ओर सीटीएम व केडीबी के सीईओ आरके सिंह कलाकारों का हौंसला बढ़ाते रहे।

१५ मिनट में तस्वीर तैयार

आप सामने बैठे रहें और उसकी कलम थामी उंगलियां महज १५ मिनट में आपका चित्र तैयार कर देती हैं। जी हां शिल्पमेले में लोगों ने अपने बच्चों और खुद के चित्र भी बनवाए। चंडीगढ़ के कलाकार कमलेश ने बताया कि वह पिछले चार सालों से लोगों के चित्र बना रहा है। इसके लिए जहां बड़ों से १०० रुपए लिए जा रहे थे वहीं बच्चों से ५० रुपए। कमलेश ने बताया कि वह चित्र में जान डालने के लिए व्यक्ति के हावभावों को सबसे ज्यादा तरजीह देता है। इसलिए १५ मिनट का समय लगता है।

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