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Sunday, Nov 22nd, 2009, 11:02 pm [IST]  

danik bhaskarकैंसर रोगियों तक राहत पहुंचाएगी संस्था

Matrix News

संदीप साहिल& कुरुक्षेत्र.

कहीं आप कैंसर से पीडि़त तो नहीं, यदि हैं तो कब से हैं? इसकी जानकारी के लिए अब आपको किसी अस्पताल में जाकर घंटों लाइन में नहीं लगना पड़ेगा? क्योंकि प्रदेश की कैंसर पर काम कर रही समाजसेवी संस्था की बलोरो गाड़ी आपके घर पहुंचेगी और आपका चेकअप करेगी। प्रदेश में बढ़ रहे कैंसर पीडि़तों के जख्मों पर मरहम लगाने की कवायद में इस संस्था ने भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से हाथ मिलाया है। खास बात यह है कि संस्था इसकी शुरूआत कुरुक्षेत्र से करने जा रही है। इसके बाद प्रदेश के अन्य जिलों में यह संस्था पहुंचेगी और हर घर का दरवाजा खटखटाएगी। संस्था के सदस्य इस मुख्य कंसेप्ट में प्रदेश की नामचीन संस्था मदद सहित अन्यों से भी हाथ मिलाने का इरादा रखते हैं।कैंसर जैसी नाइलाज बीमारी से आठ बरसों से जूझ रहे ऋषि वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्ण लाल वधवा का कहना है कि हमारे देश में सभी अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हैं, उन्हें किसी गंभीर बीमारी की जानकारी तभी मिलती है जब पानी सिर से गुजर चुका होता है, वधवा ने माना खुद उनके साथ भी ऐसा ही हुआ है। वधवा ने कहा कि उनका इरादा सिर्फ कैंसर पीडि़तों को ढूंढने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वाभिमान ट्रस्ट के साथ मिलकर कन्या भू्रण हत्या, बुजुर्गो के अनादर, मिलावट व अश्लीलता के खिलाफ भी अभियान चलाना चाहते हैं। असल में आज लोगों को जगाने की सख्त जरूरत है, जब तक आप किसी के दिलो दिमाग में नहीं पहुंचेंगे तब तक कुछ भी संभव नहीं। स्वाभिमान ट्रस्ट की पदाधिकारी डा. शालिनी शर्मा ने कहा कि जल्द ही बलोरो गाड़ी घर घर जाकर दस्तक देगी और डाक्टरों की टीम उनका चेकअप करेगी, यह एक शुरूआत है, हरियाणा के बाद इसे पूरे देश में ले जाने की कवायद पर भी हम विचार विमर्श करेंगे। वहीं दूसरी ओर मदद संस्था के अध्यक्ष देवेंद्र राणा व उपाध्यक्षा अंजू छाबड़ा ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक अनूठी पहल है और मदद संस्था इस पुनीत कार्य में उनका पूरा सहयोग देने को तैयार है।

बच्चें में ब्लड कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर के रोगी अधिक: जालंधर से आए कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. विनोद कुमार टिक्कू ने भास्कर से खास बातचीत में माना कि बच्चों में ब्लड कैंसर और महिलाओं में स्तन, पुरुषों में फेफडों के कैंसर के रोगी बहुतायत में हैं। कैंसर का प्राथमिक स्टेज पर इलाज संभव है, उसके बाद भी पचास फीसदी चांस रहते हैं। डा. ने माना कि आज का खानपान और अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही कैंसर का बड़ा कारण है। गांवों में तो लोग सिर्फ काम ही करते हैं, वे ये सोचते ही नहीं कि वे कैंसर की चपेट में हैं जबकि कड़वा सच ये है कि गांव में अब कैंसर के अधिक रोगी मिलने लगे हैं, उसका कारण हैं प्रदूषित पानी और लगातार स्मोकिंग। उन्होंने कहा कि सरकार के पास न तो कोई नेशनल कैंसर का अस्पताल है और न कोई ऐसी पालिसी जिससे आम आदमी इस बीमारी से बच सके। उन्होंने ऋषि वेलफेयर ट्रस्ट के कैंसर रोगियों के लिए घर घर पहुंचने के अभियान की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह कदम आज के समय की मांग के अनुरूप है। साथ ही उन्होंने आम आदमी से 40 की उम्र के पार करने के बाद वर्ष में एक बार पूरा चेकअप कराने की सलाह दी।

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