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Sunday, Nov 22nd, 2009, 11:22 pm [IST]  

danik bhaskarबेबी इशिता ने जताई भ्रूण हत्या पर चिंता

भास्कर न्यूज & कुरुक्षेत्र

जब उसे पता चला कि कन्या भ्रूण हत्या क्या है तो उसके बाल मन पर गहरा असर पड़ा। उसी दिन से दिल में ठान लिया कि इस कुरीति के खिलाफ वह अलख जगाने निकलेगी। भले ही उसकी उम्र छोटी हो लेकिन पेट में कन्या को मारने पर वह जिस तरह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती है उसे सुन हर कोई प्रण लेता है कि वह आज से इस महापाप के खिलाफ आवाज जरूर बुंलद करेगा।

प्रदेश सरकार की ओर से नियुक्त ब्रांड एंबेसडर ईशिता उप्पल ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले किसी समाचार पत्र में भ्रूण हत्या शब्द के बारे में पढ़ा था, जिसका वे मतलब नहीं समझ पाई थी। पंचकूला में सातवीं कक्षा में पढऩे वाली इशिता उप्पल ने अपने पिता डा. दीपश्री से सबसे पहले यह जाना था कि किस प्रकार कुछ माता पिता अपनी लड़की को पेट में ही मरवा डालते हैं। उन्होंने कहा कि इस भयावह घटना की जानकारी मिलने के बाद इसके खिलाफ आवाज उठाने का बीड़ा उठाया। रविवार को कच्चा घेर के आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के सभागार में उसने कन्याओं और पेड़ों की घटती संख्या चिंता जताई। वे इस सामाजिक बुराई के लिए संपूर्ण भारत की यात्रा करेंगी और इस अपराध को रोकने का संदेश हर भारतवासी तक पहुंचाने का प्रयास करेंगी। इसी के तहत वे पेड़ लगाओ और बेटी बचाओ का नारा लेकर अपनी यात्रा पर निकली हैं और 19 दिसंबर को राष्ट्रपति भवन में राष्टï्रपति प्रतिभा पाटिल के जन्म दिवस पर अपनी संदेश यात्रा का पहला सत्र समाप्त करेंगी।

जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी सुदेश मदान ने बताया कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं पर देवता निवास करते हैं। बेटे व बेटी में फर्क किए बिना दोनों की एकसमान परवरिश करनी चाहिए। बेटी को भी हर वो सुविधा देनी चाहिए, जो वे बेटे को देते हैं। इशिता के साथ आए उसके पिता डा. दीपश्री व माता मीना देवी ने कहा कि उनकी बेटी द्वारा किए जा रहे प्रयासों का समाज पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा। वे अपनी बेटी के इस कार्य में पूर्ण रूप से सहयोग करेंगे। मौके पर सिविल सर्जन डा. प्रवीण, उप जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी सुमन आर्य, रैडक्रास से राजेंद्र सैनी उपस्थित थे।

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