Monday, Nov 23rd, 2009, 7:16 am [IST]  

danik bhaskarलड़खड़ाते ही सही, हैं तो बढ़ते कदम

मति कांत सिंह

चंडीगढ़. ‘लडखड़ाते ही सही, हैं तो बढ़ते कदम..।’ शारीरिक विकलांगता को भूल कर हिम्मत से आगे बढ़े धना शेखर का यह वाक्य उन जैसे दूसरों को भी प्रेरणा देता है। रविवार को सेक्टर—17 प्लाजा में आयोजित ‘बढ़ते कदम’ अभियान में राष्ट्रीय ट्रस्ट नई दिल्ली की ओर से आए टीम लीडर धना शेखर आम आदमी की तरह सीधे होकर नहीं चल सकते।



पेशे से कंप्यूटर इंजीनियर धना विकलांगों के प्रति समाज का नजरिया बदलना चाहते हैं। वह कहते हैं, ‘विकलांग होना मेरा कसूर नहीं, माता-पिता तो मुझे उतना ही प्यार करते हैं जितना आम बच्चों को। लेकिन, न जाने क्यों समाज अलग नजर से देखता है।’



उनका कहना है कि एक उम्र के बाद समाज विकलांगों के साथ भेद भाव करने लगता है, उन्हें कम आंक कर वह अवसर नहीं दिए जाते जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने बताया कि ऑटिज्म, सेरेब्रल पेलसी व मानसिक तौर पर कमजोर लोगों के कल्याण के लिए ‘बढ़ते कदम’ अभियान सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर चलाया जा रहा है।



विकलांगों को उनके अधिकारों व अवसरों के बारे में जागरूक करना इस अभियान का मकसद है। यह अभियान आम लोगों को समझाने की एक कोशिश है कि विकलांग भी समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, वह पढ़ सकते हैं, काम कर सकते हैं, खुशियां फैला सकते हैं। उन्हें साथ और अवसर दें।



दिखाई प्रतिभा
रविवार को ‘बढ़ते कदम’कार्यक्रम में चंडीगढ़ के करीब 31 एनजीओ के सदस्यों और बच्चों ने हिस्सा लिया। आशा-चंडीमंदिर, सौरभ-36, साधना-मनीमाजरा, आशादीप-31 के बच्चों ने भंगड़ा व गिद्दा डाला और कई कार्यक्रम पेश किए। बच्चों ने बैनर व पोस्टरांे के साथ रैली भी निकाली। 3 दिसंबर को विश्व विकलांगता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

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