नई दिल्ली. हिमालय और पर्यावरण को बचाने के लिए सुंदर लाल बहुगुणा फिर से मैदान में हैं। उनके पास हिमालय को बचाने के कई उपाय हैं। दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में प्रसिद्ध पर्यावरण विशेषज्ञ ने कहा कि हिमालय को प्राकृतिक बांध बनाना चाहिए।
पहाड़ों के अलावा जहां भी जगह मिले, पेड़ लगाना चाहिए। सुंदर दिखने वाले नहीं, बल्कि रेशा व फल देने वाले पेड़ लगने चाहिए। अगली सदी वन-खेती के नाम करने से न केवल हिमालय को, बल्कि पूरी मानव सभ्यता को बचाना संभव होगा।
ग्लोबल वार्मिग के प्रभाव से हिमालय को बचाने के लिए बहुगुणा ने त्रिस्तरीय मुहिम छेड़ रखी है। बहुगुणा ने बातचीत में हिमालय को फिर से बसाने के कई अन्य उपाय भी सुझाए। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों की हरियाली देखने की लालसा का खामियाजा भारतीय आज भी भुगत रहे हैं।
अंग्रेजों ने चीड़ के पेड़ काफी संख्या में लगाए थे। ये पेड़ जमीन से पानी व पोषक तत्व काफी मात्रा में सोख लेते हैं। इस कारण हिमालय में रेगिस्तान बनने लगा है। इन समस्याओं से मुक्तिके लिए हिमालय में सिरोली, चुलु, पदम, शहतूत, चेसनट, अखरोट, नटसिखे जैसे फलदार एवं रेशेदार पेड़ लगाने का अभियान चलाना होगा। हिमालय को बचाने के लिए उन्होंने तीन स्तरीय अभियान शुरू किया है।
प्रथम चरण में वे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, अरुणाचल, नगालैंड, सिक्किम, मेघालय, मणिपुर आदि राज्यों का दौरा कर चुके हैं। अगले चरण में वे ऐसे राज्यों का दौरा करेंगे, जहां से नदियां गुजरती हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल राज्य होंगे। अंतिम चरण में नेपाल, भूटान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान का दौरा करेंगे। अंत में दिल्ली में बैठक कर मुहिम की समीक्षा करेंगे।










