नई दिल्ली. महंगाई के इस दौर में घर बसाने की चाहत दिनों-दिन महंगी होती जा रही हैं और रही सही कसर विवाह के गिने-चुने मुहूर्त ने पूरी कर दी है। इस बार नवंबर से फ रवरी के बीच विवाह के इतने कम साये हैं कि लोगों को आयोजन स्थल की कमी का संकट झेलना पड़ रहा है और इसका प्रबंधन करने के लिए उन्हें अपनी जेब पहले से कहीं अधिक ढीली करनी पड़ रही है। बाकी खचरें का नंबर तो बाद में आता है।
इस बार 22 नवंबर को जितनी शादियां हुईं, 28 नवंबर को इससे भी ज्यादा शादियों की उम्मीद है। इन दो दिनों में दिल्ली में दस हजार जोड़ियां सात फेरे लेने जा रही हैं और इसका खर्चा आएगा एक हजार करोड़ रुपए, जो किसी भी आम चुनाव पर आने वाले खर्च से कुछ ही कम होगा।
निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों को निपटाने में 1300 करोड़ रुपए खर्च किए थे, लेकिन शादियों के इस मौसम में अमीरों की जेब पर लगने वाली चपत इस आंकड़े से ज्यादा भी हो सकती है। नवंबर से फरवरी के बीच 24 तारीखें ही ऐसी हैं, जिस दिन फेरे लिए जा सकते हैं। ज्योतिषियों के मुताबिक 22 नवंबर के अलावा 28 नवंबर को शहर की दस हजार जोड़ियां घर बसाने जा रही हैं, जबकि 21 हजार जोड़े इस मौसम में ‘उन’ लम्हों का इंतजार कर रहे हैं।
दिल्ली के एक ज्योतिषि जेके सेठ कहते हैं कि शादी के लिए यही सबसे बेहतर मौका है। उन्होंने बताया कि 28 नवंबर के बाद ग्रह अपनी जगह बदलने वाले हैं और शुभ घड़ी निकल जाएगी, इसलिए लोग इससे पहले ही फेरे लेने के लिए ज्यादा उत्सुक हैं। पेशे से वेडिंग प्लानर मोनिका चोपड़ा कहती हैं कि शादी लोग जिंदगी में एक बार ही करते हैं।
उन लम्हों को यादगार बनाने के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करने से लोगों को कोई हिचक नहीं है। चोपड़ा कहती हैं कि अमूमन शादी के समारोहों में लोग एक से डेढ़ लाख तक खर्च कर देते हैं, लेकिन इसक ा बढ़ना उनके बजट पर निर्भर करता है। मोनिका ने अभी तक जितनी शादियां कराई हैं, उनमें सबसे महंगी 34 लाख रुपए की थी।
हालांकि उनके मुताबिक एक ‘स्टैंडर्ड’ की शादी में दस लाख रुपए का खर्चा आ जाता है। जाड़े की वजह से भी विवाह स्थलों की कमी है और इनके कि रायों में 15 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। बैंक्वेट हॉल के पेशे से जुड़े असलम खान कहते हैं कि शाकाहारियों और मांसाहारियों के लिए प्रति व्यक्ति खाने का बजट 750 और 850 रुपए का है। यहां सजावट के सामान से लेकर शादी के काम में आने वाली हर चीज महंगी होती जा रही है।
राजधानी के पांच सितारा श्रेणी के होटलों के लिए भी यह वक्त धंधे में चांदी काटने का है। दक्षिण दिल्ली के हयात रिजेंसी ने अपने खाने की दर पिछले साल से तीन सौ बढ़ाकर 2400 रुपए कर दिए हैं। इसके अलावा दूसरे होटल भी इस होड़ में पीछे नहीं हैं।
महंगी होती जा रही घर बसाने की चाहत
दो दिनों में दिल्ली में दस हजार जोड़ियां सात फेरे लेने जा रही हैं और इसका खर्चा आएगा एक हजार करोड़ रुपए, जो किसी भी आम चुनाव पर आने वाले खर्च से कुछ ही कम होगा। निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों को निपटाने में 1300 करोड़ रुपए खर्च किए थे, लेकिन शादियों के इस मौसम में अमीरों की जेब पर लगने वाली चपत इस आंकड़े से ज्यादा भी हो सकती है।










