Monday, Nov 23rd, 2009, 3:28 pm [IST]  
danik bhaskar..नहीं तो आपका दिल हो सकता है बीमार
Bhaskar News

नई दिल्ली. सौरवराज (30) कामकाज के सिलसिले में अक्सर टूर पर रहते हैं। वह रोज कम से कम डेढ़ लीटर कोल्ड ड्रिंक पीते हैं और दो बार पिज्जा, बर्गर या नूडल्स से काम चलाते हैं। शरीर के बाकी हिस्सों के मुकाबले उनके पेट का साइज बढ़ गया है, अगर एक किमी पैदल चलना पड़ जाए तो वह पसीना-पसीना हो जाते हैं। फिर भी वह अपने आप को पूरी तरह से स्वस्थ मानते हैं, क्योंकि कोई और दिक्कत नहीं है।



राकेश (25) एक मल्टीनेशनल कंपनी में हैं और अक्सर नाइट शिफ्ट करते हैं। काम के दौरान सक्रिय रहने के लिए वह हर घंटे में एक सिगरेट या कॉफी जरूर पीते हैं। दो मंजिल सीढ़ियां चढ़ने में उनकी सांस उखड़ने लगती है, बावजूद इसके वह अपने आप को फिट मानते हैं। क्योंकि उन्हें किसी तरह के दर्द की शिकायत नहीं है।



इस बाबत वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेश त्रेहन कहते हैं कि ये सारे इशारे दिल के लिए खतरे की घंटी हैं। अगर शारीरिक अवस्था इसी तरह कुछ वर्ष और चलती रही और चिकित्सक से इलाज नहीं करवाया गया तो दिल जवाब दे सकता है। लाइफ स्टाइल में बदलाव की वजह से मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर व हाइपर टेंशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो आगे चलकर हृदय से संबंधित बीमारियों का कारण बनती हैं।



ऐसे में यह सोचकर कि दिल की बीमारी ६क् वर्ष के करीब पहुंचने पर दस्तक देगी, यह सोचना गलत है। इस कारण शरीर के छोटे-छोटे इशारों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हार्ट केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल कहते हैं कि पहले यह माना जाता था कि दिल की बीमारी होने की औसत उम्र 60 साल है, बाद में इसे 55 मान लिया गया, फिर 50। लेकिन, अब इसे 40 वर्ष की उम्र का माना गया है। उनका कहना है कि ठंड के सीजन में विशेष एहतियात बरतनी चाहिए। ठंड के समय हार्ट अटैक की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसलिए सेहत को लेकर थोड़ी सी लापरवाही गंभीर समस्या बन सकती है।



बदलनी ही होगी दिनचर्या



जिस तरह से दिल के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाला समय किस तरह का होगा। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक लोग अपनी दिनचर्या में बदलाव नहीं करेंगे। दिल के रोग से निजात पाना मुश्किल होगा। इसके साथ ही खान-पान पर भी नियंत्रण करना होगा। तभी इस रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है। दिनचर्या के लिए बचपन से ही आदत डालनी होगी।



एबीसीडीईएफजी का फार्मूला



ए - अब्डॉमेन, यानी पेट की चौड़ाई पुरुषों के लिए 35 से कम और औरतों के लिए 32 से कम ठीक।



बी - ब्लड प्रेशर को 120/80 से कम और बैड कोलेस्ट्रॉल को 100 से कम।



सी - अपने सामने किसी को सिगरेट न पीने दें।



डी - डाइट पर दें ध्यान, यानी खाने में सात कलर, पांच फल, छह स्वाद, हाई फाइबर, लो रिफाइन काबरेहाइड्रेट और लो क्वांटिटी डाइट को दें प्राथमिकता।



ई - एक्सरसाइज व रोज दस हजार कदम टहलने या 20 मिनट तक जॉगिंग रूटीन में शामिल करें।



एफ - माइंड डाइवर्जन ने लिए छोड़ें इसे खाली।



जी - गॉड की तरफ कंसन्ट्रेशन यानी मेडिटेशन व प्राणायाम करें।

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