इंदौर. आयुष योजना के तहत डेढ़ साल पहले जिला आयुर्वेद कार्यालय को मिली लाखों की दवाइयों व उपकरणों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। अभी तक आयुष विंग भी नहीं बन पाई है। वहीं शासकीय हुकमचंद पॉलीक्लिनिक में ‘पंचकर्म’ शुरू करने की कवायद एक साल से चल रही है लेकिन अब तक यह सुविधा शुरू नहीं हो पाई है।
स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत 2005 में ‘आयुष’ योजना शुरू की थी। इसके तहत जिला अस्पताल सहित पांच अस्पतालों का चयन किया गया था। यहां क्षार सूत्र, होम्योपैथी, आयुर्वेद, पंचकर्म और योग व सिद्धा चिकित्सा पद्धति शुरू की जाना थी।
जिला अस्पताल के लिए डेढ़ साल पहले करीब 20 लाख की लागत से उपकरण और दवाइयां भेजी गई थीं जो जिला आयुर्वेद कार्यालय में रखी हैं। ये सब उसी तरह रखे हैं। जिला अस्पताल में भवन निर्माण पूरा नहीं होने तथा चिकित्सकों के नहीं होने से इनका उपयोग नहीं किया जा रहा।
हुकमचंद पॉलीक्लिनिक में भी न तो अधिकारी और न ही आयुर्वेद प्रकोष्ठ ने यहां पंचकर्म शुरू करने में रुचि दिखाई। ज्यादातर लोगों को तो यह भी नहीं पता कि यहां आयुर्वेद पद्धति से इलाज किया जाता है। इस बारे में अस्पताल में आयुर्वेद प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. एल.आर. श्रीवास्तव ने बताया कि हमारे पास प्रशिक्षित स्टाफ है। पंचकर्म शुरू करने के लिए अधिकारियों को भी लिखा है। दवाइयों का उपयोग इसलिए नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि वे जिला अस्पताल के लिए थीं।
नहीं कर सकते इस्तेमाल
आयुष के तहत मिली आयुर्वेदिक दवाइयां बेकार हो रही हैं?
आयुर्वेदिक दवाइयां एक्सपायरी नहीं होती हैं। चूंकि दवाइयां आयुष विंग के लिए आई हैं, इसलिए हम उसका उपयोग नहीं कर सकते।
हुकमचंद पॉलीक्लिनिक में पंचकर्म शुरू क्यों नहीं किया जा रहा है?
वहां स्टाफ नहीं है।
वहां डॉक्टर व अन्य स्टाफ तो है।
हां, लेकिन वार्डबॉय सहित अन्य लोग भी चाहिए।
कब तक शुरू किया जाएगा?
जल्द ही इसे शुरू करने की कोशिश की जा रही है। नियुक्तियां शासन स्तर पर की जा रही हैं। (डॉ. सोमेन्द्र मिश्रा, जिला आयुर्वेद अधिकारी)










