राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों को लेकर तमाम विवादों और आशंकाओं से गुजरने के बाद नए वर्ष में प्रवेश करते समय इन खेलों का दिल्ली में अक्टूबर में सफल आयोजन 2010 में भारत के सामने सबसे बडी चुनौती होगा।
2010 में सभी नजरें तीन से 14 अक्टूबर तक राजधानी में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों पर लगी होंगी जिनके लिए 2009 के आखिर तक तैयारियां पूरी नहीं हो पाई हैं। राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति ने वादा किया है कि आयोजन पूरी तरह सफल रहेगा और मई तक सभी निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
लेकिन इन खेलों को लेकर आशंकाएं लगातार कायम हैं। वर्ष 2009 में आयोजन समिति और राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के अध्यक्ष माइकल फेनेल के बीच सीजीएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल हूपर को लेकर जबर्दस्त टकराव चला। आखिर में इस मामले में खेल मंत्नी एम एस गिल को हस्तक्षेप करना पडा।
अक्टूबर के अंत में लंदन में लंदन के बकिघम पैलेस से क्वींस बेटन रिले के अंतरराष्ट्रीय सफर पर रवाना होने के अवसर पर कलमाडी और फेनेल के बीच का टकराव सुलझाया गया१ कलमाडी इससे पहले तक हूपर को वापस भेजने की मांग कर रहे थे जबकि फेनेल ने साफ शब्दों में कह दिया था कि वह खेलों की अपनी तैयारियों पर ज्यादा ध्यान दे।
गत वर्ष के तमाम विवाद अब इतिहास के पन्नों में जा चुके हैं और सभी नजरें इस बात पर लगी हुई हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए स्टेडियमों का निर्माण 31 मार्च की नयी समयसीमा तक पूरा हो जाए। इन खेलों के उद्घाटन एवं समापन समारोह स्थल जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के 31 मई तक पूरा होने की बात कही जा रही है।
इन सबके बीच यह भी यक्ष प्रश्न है कि इन खेलों में भारतीय खिलाडियों का प्रदर्शन कैसा रहेगा१ इन खेलों की तैयारियों के लिए 1100 से ज्यादा भारतीय खिलाडियों का अलग.अलग जगहों पर प्रशिक्षण चल रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्नी शीला दीक्षित का यह बयान काफी मायने रखता है कि हे ईश्वर राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन सफल हो जाए और देश की प्रतिष्ठा को धक्का न लगे।
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