जयपुर। शहर में मेट्रो के लिए पूरा ट्रैक तैयार हो जाने के बाद 24 ट्रेनें चलेंगी। प्रत्येक ट्रेन में चार कोच के हिसाब से 96 कोच की जरूरत होगी। हालांकि नवंबर 2013 में मानसरोवर से सिंधी कैंप तक के रूट को शुरू करने का लक्ष्य है, इसके लिए 7 ट्रेनों की ही जरूरत पड़ेगी, लेकिन बाद में दिसंबर 2014 में दोनों कॉरिडोर पर मेट्रो संचालन के लिए कुल 24 ट्रेनों की जरूरत पड़ेगी। ट्रेनों के सभी कोच अत्याधुनिक होंगे। इनकी चौड़ाई 2.9 मीटर की होगी।
डीएमआरसी के प्रोजेक्ट इंजीनियर ललित मेघनानी ने बताया कि मेट्रो ट्रेन को चलाने के दौरान शहर के हेरिटेज स्वरूप को बरकरार रखने का पूरा प्रयास किया जाएगा। इसी के मद्देनजर पुराने शहर में 8.5 किमी की दूरी में इसे अंडरग्राउंड चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर में 9 ट्रेन और उत्तर—दक्षिण कॉरिडोर में 15 मेट्रो ट्रेन की जरूरत पड़ेगी। हर ट्रेन में 4 कोच होंगे।
दुर्गापुरा और मानसरोवर में बनेंगे डिपो : मेट्रो के लिए दुर्गापुरा और मानसरोवर में डिपो बनेंगे। दुर्गापुरा में कृषि अनुसंधान केंद्र की जमीन पर और मानसरोवर में अंतरराष्ट्रीय बस टर्मिनल (दिसावर) के लिए प्रस्तावित की गई जमीन पर डिपो बनाया जाएगा। डीएमआरसी के अधिकारियों के अनुसार दुर्गापुरा में मेन डिपो होगा जिसके लिए 30 हेक्टेयर जमीन चिह्न्ति की गई है। सुबह 6 से रात 12 बजे तक संचालन के बाद रात को इन डिपो में ट्रेनों को खड़ा की जाएगी और इनकी धुलाई व मेंटीनेंस किया जाएगा। इसके लिए यहां वर्कशॉप भी बनाई जाएगी।
जयपुर में होगा मीडियम रेल ट्रांजिट सिस्टम : जयपुर में आबादी की तेजी से ग्रोथ को देखते हुए मीडियम रेल ट्रांजिट सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिसमें एक घंटे में एक दिशा में 25 हजार से 50 हजार लोग यात्रा कर सकेंगे। वर्ष 2031 में यहां की अनुमानित जनसंख्या 80 लाख को पार कर जाएगी। दिल्ली में हैवी रेल ट्रांजिट सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें एक घंटे में 60 से 80 हजार लोग यात्रा कर सकते हैं वहीं पूना में प्रस्तावित मेट्रो में लाइट रेल सिस्टम लागू किया जाना है, जिसमें एक घंटे में एक दिशा में 25 हजार यात्री सफर कर सकेंगे।
साढ़े 28 किमी : दो कॉरिडोर
मेट्रो के दो कॉरिडोर होंगे। दोनों की कुल लंबाई 28.55 किमी होगी। पहला कॉरिडोर (उत्तर दक्षिण) दुर्गापुरा से अंबाबाड़ी तक होगा। इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 17.35 किमी होगी। दूसरा कॉरिडोर पूर्व से पश्चिम होगा, जिसमंे बड़ी चौपड़ से मानसरोवर तक 11.20 किमी तक मेट्रो चलेगी। दोनों कॉरिडोर में 20.86 किलोमीटर तक मेट्रो का ट्रेक एलीवेटेड होगा, जबकि 7.69 किमी ट्रैक अंडरग्राउंड बनेगा। वहीं, ट्रेन के लिए ट्रैक की चौड़ाई स्टेंडर्ड गेज के अनुसार 1.435 मीटर रखी जाएगी। दिल्ली में मेट्रो मीटर गेज (1.6 मीटर करीब) में चलती है।
29 स्टेशन बनेंगे : शहर में दोनों कॉरिडोर में मेट्रो के 29 स्टेशन बनाए जाएंगे। पहले कॉरिडोर में कुल 18 स्टेशन होंगे जिनमें 5 स्टेशन भूमिगत और 13 भूमि के ऊपर पोल्स पर होंगे। दूसरे कॉरिडोर में 11 स्टेशन होंगे, जिनमें 3 भूमिगत और 8 एलीवेटेड होंगे।
भूमिगत स्टेशन वातानुकूलित : भूमिगत बनने वाले सभी स्टेशन वातानुकूलित होंगे। सभी स्टेशन पर विकलांग व निशक्तजनों के लिए लिफ्ट की सुविधा होंगी और टिकट स्थल से एलीवेटेड प्लेटफार्म तक एस्केलेटर लगाए जाएंगे। एलीवेटेड चलने वाली मेट्रो के लिए सड़क के बीच डिवाइडर पर ट्रेक बनाया जाएगा।
ऑटोमेटिक सिस्टम होगा : प्लेटफार्म पर प्रवेश करने और मेट्रो में सफर करने वालों के लिए ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लागू किया जाएगा। जिन लोगों का मेट्रो में आना जाना ज्यादा रहेगा, उनको स्मार्ट कार्ड दिए जाएंगे। प्लेटफार्म पर ऑटोमेटिक गेट तब ही खुलेगा जब यात्री यहां लगी मशीन को अपना स्मार्ट कार्ड दिखाएगा। ऐसा मेट्रो में सफर के बाद प्लेटफार्म से बाहर आते समय भी करना होगा। यह मशीन स्मार्ट कार्ड से यात्रा का तय किराया काट लेगी। इसके अलावा सामान्य यात्रियों को स्टेशन पर बुकिंग विंडो से टिकट के स्थान पर प्लास्टिक के काइन दिए जाएंगे। ये काइन भी मशीन में इन्सर्ट करने होंगे।
मंजूरी मिलते ही काम शुरू : गहलोत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलते ही मेट्रो ट्रेन का काम शुरू कर दिया जाएगा। गहलोत ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर मेट्रो ट्रेन के लिए तैयार की गई डीपीआर सौंपने के अवसर पर कहा कि परियोजना को शुरू करने से पहले मंत्रिमंडल की बैठक में विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। गहलोत ने कहा, इसके लिए ऋण की व्यवस्था करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से रिकॉर्ड समय में डीपीआर तैयार की गई है, उसी तरह डीएमआरसी के अधिकारी मेटो ट्रेन को भी समयबद्ध तरीके से पूरा करने का पूरा प्रयास करें।
राज्य स्तर पर देरी नहीं : धारीवाल
नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि मेट्रो के लिए राज्य सरकार के स्तर पर कोई विलंब नहीं होगा। मामूली देरी हुई तो वह ऋण लेने की प्रक्रिया में होगी। ये काम केंद्र सरकार के स्तर पर होने हैं। उन्होंने कहा, मेट्रो के लिए तय समय में डीपीआर तैयार होने से स्पष्ट है कि राज्य में सब काम समय पर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि मेट्रो के लिए कोचीन मॉडल और चेन्नई मॉडल में से कौन सा लेना है, इस पर मंत्रिमंडल निर्णय करेगा। धारीवाल ने कहा कि ऋण के लिए विभिन्न बैंकिंग एजेंसियों से चर्चा की जा रही है। जापान बैंक ने मोटे तौर पर सहमति दे दी है। निजी क्षेत्र से ऋण नहीं लिया जाएगा।










