जयपुर। सरकारी महकमों की लालफीताशाही के कारण राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की राजआंगन योजना में मकान लेने वाले प्रवासी राजस्थानी 10 साल बाद भी अपना हक लेने के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। इस योजना में मकान लेने वाले प्रवासी अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। विदेशों में बसे प्रवासी राजस्थानियों को उनकी जड़ों से जोड़ने और उनको निवेश के लिए आकर्षित करने का दावा करने वाली सरकार ने कभी इनकी सुध नहीं ली।
13 एनआरआई को 10 साल में भी नहीं मिले मकान : राजआंगन योजना में एनआरआई के लिए 303 बंगले बनने थे, लेकिन अभी भी 13 एनआरआई को पूरी कीमत चुका देने के बावजूद मकान नहीं मिले हैं। इनमें 13 बंगलों की जमीन पर किसानों का कब्जा है और उनकी जमीन अवाप्ति के बदले मुआवजे का मामला निबटाने में हाउसिंग बोर्ड नाकाम रहा है। अपना हक लेने के लिए एनआरआई ने सरकार के हर स्तर पर गुहार की, लेकिन उनकी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
मकान के लिए ही संघर्ष तो निवेश करने पर क्या होगा
सरकारी महकमों की लालफीताशाही और अनदेखी के खिलाफ अब आप्रवासी राजस्थानियों का आक्रोश फूट पड़ा है। राजआंगन योजना में रह रहे आप्रवासियों ने सोमवार को भास्कर कार्यालय में अपनी व्यथा सुनाई। राजआंगन रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.पी. मधु ने बताया कि सरकार के आमंत्रण पर यहां मकान खरीदने से हमारी यह दुर्गति होगी, यह सपने में भी नहीं सोचा था। एक मकान के लिए 10 साल से एनआरआई सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं तो निवेश करने पर तो पता नहीं क्या क्या होगा। ऐसे माहौल में राजस्थान में कौन आप्रवासी निवेश करेगा। राजआंगन योजना में जिस तरह आप्रवासी राजस्थानियों के साथ धोखा हुआ है, उसका लाखों आप्रवासी राजस्थानियों में बहुत गलत संदेश गया है।










