चंडीगढ़. ज्वेलरी पहनने में तो लड़कियों ने बाजी मारी हुई है, लेकिन इसकी डिजाइनिंग में अब लड़के भी पीछे नहीं हैं।
मंगलवार को सेक्टर-35 के ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट में लड़कियों से ज्यादा लड़के ज्वेलरी डिजाइनर के रूप में सामने आए। कंटेम्पररी डिजाइन कलेक्शन में अवॉर्ड विनिंग स्टूडेंट्स ने अपनी कलेक्शन शोकेस की।
कांच से लेकर कॉइन तक
शोकेस की गई ज्वेलरी में कांच, ब्रास, कॉपर, सिल्वर, बैंबू, लकड़ी और कॉइन का इस्तेमाल किया गया है। डिजाइनर मयंक वर्मा की कलेक्शन में ज्यादातर कांच से बनी ज्वेलरी देखने को मिली। मयंक मोस्ट कमर्शियली वाएबल कलेक्शन 2009 अवॉर्ड भी जीत चुके हैं। फिलहाल वह गीतांजली ग्रुप के साथ काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांच की सिर्फ चूड़ियां ही नहीं बनती, इससे और भी ज्वेलरी बनाई जा सकती है, जो ट्रेंडी लगे। उन्होंने कांच से पेंडेंट, रिंग और सैंडल बनाए हैं। चमक के लिए मिठाई के ऊपर लगा सिलवर वर्क लगाया है। यह स्टाइलिश लुक तो देता ही है, साथ ही महंगा भी नहीं होता। नेहा वर्मा ने किच नामक कलेक्शन में कंचे, रबड़ ट्यूब, कॉइन्स और ब्रास का इस्तेमाल किया है।
ब्रास से नाखून भी बनाए हैं, जो रिंग की तरह पहने जाते हैं। 10 पैसे के कॉइन्स इकट्ठे करे इन्हें ईयररिंग्स और पेंडेंट के रूप में सजाया है। पुरानी टायर ट्यूब से हैंगिंग बैग बनाया है। इसी कलेक्शन के लिए नेहा को वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल अवॉर्ड (मोस्ट इनोवेटिव कलेक्शन) 2008 भी मिला है।
डिटैचेबल का है जमाना
शालिका जैन की कलेक्शन में डिटैचेबल असेसरीज हैं। शालिका ने ऐसी रिंग बनाई है, जिसके डिजाइन को अलग करने से वह ईयररिंग बन जाती है। शालिका ने थ्रेड ज्वेलरी, ब्रास ज्वेलरी और डेनिम ज्वेलरी में भी डिजाइन तैयार किए हैं। शालिका डिजाइनर रघुवेंद्र राठोर के साथ भी डिजाइनिंग कर चुकी हैं। डिजाइनर थॉमस लुइल ने वुड में डिटैचेबल ज्वेलरी तैयार की है। वह मानते हैं वुडन ज्वेलरी हमेशा के लिए है।
बिजली की तारों से ज्वेलरी
डिजाइनर राजीव खत्री ने केन फर्नीचर की नॉट्स व बिजली की तारों से ज्वेलरी डिजाइन की है। घर पर वेस्ट हो चुकी तारों को मोल्ड करके ब्रेसलेट और नेकपीस तैयार किया है। वह मैकेनिकल कलेक्शन पर काम कर रहे हैं।










