चंडीगढ़. सुखबीर-कालिया रिसोर्स मोबलाइजेशन कमेटी द्वारा की गई 4000 करोड़ के नए टैक्स लगाने की सिफारिश को लेकर भाजपा के अंदर मतभेद पैदा हो गए हैं। पार्टी के कुछ नेता चाहते हैं कि सिफारिशों को लागू करने से पहले इन पर पार्टी की कोर कमेटी की मीटिंग में चर्चा की जाए। हालांकि भाजपा ने आधिकारिक रूप से रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन कुछ वरिष्ठ नेताओं के इस तरह की राय जताने के बाद टैक्स लगाने पर असमंजस की स्थिति बन गई है।
भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न सेक्टरों पर टैक्स लगाने के सुझाव गले नहीं उतर रहे। उनका कहना है कि रिपोर्ट में कुछ बातें साफ नहीं हैं जिन्हें कोर कमेटी की मीटिंग बुलाकर स्पष्ट किया जाएगा। उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स लगाने पर सख्त ऐतराज है। हालांकि दो सदस्यीय कमेटी के सदस्य मनोरंजन कालिया इसे ‘मजबूरी’ बता चुके हैं। कालिया ने कहा था कि जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्यूवल मिशन के तहत केंद्रीय ग्रांट तभी मिलेगी जब शहरों में प्रॉपर्टी टैक्स लगाया जाएगा, सीवरेज-पानी के बिल वसूले जाएंगे और दूसरे रिफार्म्स किए जाएंगे।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि शहरों में पहले से हाउस टैक्स लगा है। कमेटी ने ये स्पष्ट नहीं किया कि क्या प्रॉपर्टी टैक्स लगने के बाद हाउस टैक्स खत्म हो जाएगा। ये भी साफ नहीं किया कि प्रॉपर्टी टैक्स केवल शहरों, नगर पालिकाओं व नगर निगमों में लगेगा या पूरे पंजाब में। मैरिज पैलेस और किसानों की जमीन शहरों से बाहर पड़ती है। क्या उन पर भी ये टैक्स लागू होगा? पांच मरले तक के मकानों के सीवरेज-पानी के जो बिल माफ किए गए हैं, उनका क्या होगा? किसानों से 50 रुपए प्रति हार्स पावर के हिसाब से बिल वसूलने पर भी उन्हें ऐतराज है। वह जानना चाहते हैं कि इसे ‘रीइम्बर्स’ कैसे किया जाएगा?
इन नेताओं ने कहा है कि सारे सवालों के जवाब तलाशने के लिए जल्दी ही कोर कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी। बेशक रिपोर्ट 22 जनवरी को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में पारित हो जाएगी लेकिन अगर किसी प्रस्ताव पर आपत्ति हुई तो उसमें फेरबदल किया जाएगा।










