Friday, Jan 22nd, 2010, 2:01 am [IST]  
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danik bhaskarअफसरों ने ही उठाए सवाल
विशेष संवाददाता

जयपुर। प्रशासन शहरों के संग अभियान सम्मेलन में गुरुवार को आवासीय से वाणिज्यिक या अन्य प्रयोजन के लिए भू-उपयोग परिवर्तन को लेकर कई अधिकारियों ने सरकारी नीतियों को अव्यावहारिक बताया।



पुराने शहरों और कस्बों में 40 फुट से छोटी सड़कों में भू-उपयोग करने के स्थान पर एसटीपी (सीनियर टाउन प्लानर) की ओर से आपत्ति लगाकर लौटा दिया जाता है। इसके चलते भू-उपयोग परिवर्तन नहीं हो पाता और पालिकाओं को करोड़ों की आय से वंचित रहना पड़ता है। इन शहरों में दुकानदार इस परिवर्तन के लिए पैसा जमा कराने को तैयार हैं। अगर कोई अधिकारी इनका उपयोग परिवर्तन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई कर दी जाती है।



अधिकारियों का कहना था कि राजधानी में बैठे आला अफसर दूरदराज के शहरों की हकीकत को समझे बिना ही नीति बना देते हैं। पालिका अधिकारियों के सवालों पर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल और नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव जी.एस. संधू को मौके पर ही हल निकालना पड़ा। घोषणा की गई कि शुक्रवार को सभी जोनों के एसटीपी और डीटीपी (डिप्टी टाउन प्लानर) की विशेष बैठक बुलाकर हल निकालंे और 26 जनवरी से पहले निर्णय लेकर आदेश जारी कर दें।



कुछ एसटीपी का कहना था कि प्रावधानों में रोड की चौड़ाई, पार्किग की जगह और हाईकोर्ट के निर्देशों के कारण आवासीय से व्यावसायिक नहीं कर सकते। पूर्व सरकार ने पॉलिसी बनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने स्टे कर दिया था। एटीपी ने अधिकारियों को यह भी सलाह दी कि भू-उपयोग परिवर्तन के लिए पूरा ले-आउट प्लान भेजें ताकि शीघ्र निर्णय लिया जा सके।



ये समस्याएं बताईं : सम्मलेन के दौरान राज्यभर से आए नगरीय निकायों के अधिकारियों ने अपने क्षेत्र में सामान्यतौर पर आने वाली समस्याओं का जिक्र किया। श्रीडूंगरगढ़ से आए ईओ किशनाराम सैंगवा ने मुद्दा उठाया और कहा कि कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के भू उपयोग परिवर्तन में तो नियमों में सरलीकरण कर दिया, लेकिन आबादी क्षेत्र में आवासीय से वाणिज्यिक या अन्य परिवर्तन नहीं हो पाता। एसटीपी आपत्ति लगाकर लौटा देते हैं। राजस्थान नगरपालिका भू उपयोग परिवर्तन नियम 2000 में इसके लिए प्रावधान नहीं हैं।



लैंड रेवेन्यू एक्ट और टीनेंसी एक्ट का शहरों में क्या काम : धारीवाल



नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने कहा है कि लैंड रेवेन्यू एक्ट और टीनेंसी एक्ट शहरी क्षेत्र में लागू नहीं हो, वे इसके पक्ष में हंै। ये एक्ट तो वैसे भी ग्रामीण क्षेत्र में आने वाली कृषि भूमि के लिए हैं। इस एक्ट के चलते शहरों में भ-उपयोग परिवर्तन की दिक्कतें आती हैं।



धारीवाल ने प्रशासन शहरों के संग अभियान के लिए जुटे अधिकारियों के सम्मेलन में कहा कि इन कानूनों को शहरी क्षेत्र से हटाने के संबंध में यह उनकी राय है। उन्होंने कहा, टाउन एंड कंट्री एक्ट तैयार हो रहा है। मॉडल बिल्डिंग बाईलॉज बनाए गए हैं। उन्हें सभी निकायों को भेजा जाएगा। वे इसे बोर्ड में रखकर अपना सकते हैं। अभियान में वर्तमान बाईलॉज से ही नियमन होंगे। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि अभियान की सफलता ही अधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड होगा।

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