भोपाल/नई दिल्ली. कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के विश्वविद्यालयों के दौरे से राजनीति गरमा गई है। इंदौर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में राहुल के कार्यक्रम को लेकर राज्य सरकार के उच्च शिक्षा आयुक्त ने कुलपति और रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया है।
उच्च शिक्षा आयुक्त ने कुलपति अजित सहरावत और रजिस्टार आरडी मुसलगांवकर को नोटिस जारी कर पूछा है कि कांग्रेस नेता के राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन की इजाजत किसने दी? मंगलवार को राहुल ने यहां विद्यार्थियों से रू-ब-रू होकर राजनीति में सक्रिय होने को कहा था। दूसरी ओर भाजपा नेता मनोहर पर्रिकर ने गोवा विवि कैंपस में राहुल के राजनीतिक कार्यक्रम को अनुमति दिए जाने के लिए रजिस्टार को बर्खास्त करने की मांग की है।
याद रहे कि राहुल गांधी को कानपुर विश्वविद्यालय में कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करने के मामले में यहां के कुलपति को मुख्यमंत्री मायावती के कोपभाजन होना पड़ा था। वहीं मध्यप्रदेश से भाजपा संसाद अनिल माधव दवे ने वि.वि के कुलपतियों को पत्र लिखकर राहुल की तर्ज पर बतौर सांसद उन्हें भी अपने यहां छात्रों से संवाद कायम करने के लिए आमंत्रित किए जाने की मांगकर धर्मसंकट में डाल दिया है।
नोटिस के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को अपने गिरेबां में झांकने की नसीहत देते हुए सवाल पूछा कि मुख्यमंत्री बताएं कि वे कितनी बार विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में गए हैं। जहां तक राहुल गांधी के विश्वविद्यालय के दौरों का सवाल है, तो उन्हें आमंत्रित किया गया था। सिर्फ नोटिस देने का कोई मतलब नहीं है, चौहान को राजनीतिक लड़ाई लड़नी चाहिए।
राहुल के बचाव में उतरे एक अन्य कांग्रेस महासचिव और मध्यप्रदेश के प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा-धर्म के नाम पर और राम का नाम बेचकर राजनीति करने वाले मुख्यमंत्री को राहुल गांधी के नाम पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। इंदौर विवि में राहुल के कार्यक्रम में एनएसयूआई के होर्डिग लगे होने के सवाल पर उनका कहना था कि शिक्षण संस्थानों में कई छात्र संगठन होते हैं, ऐसे में छात्रों ने ही बैनर लगाए होंगे। इंदौर में विवादित नेता मोहन सेंगर के राहुल गांधी से मिलने के सवाल पर उनका कहना था- कार्यकर्ताओं ने हवाई अड्डे पर ही राहुल गांधी का स्वागत किया था।










