वीर
रेटिंग ***
निर्देशक : अनिल शर्मा
प्रोड्यूसर : विजय गलानी
कहानी : सलमान खान
संवाद : शक्तिमान
गीत : गुलजार
संगीत : साजिद - वाजिद
कलाकार : सलमान खान, जरीन खान, सोहेल खान, मिथुन चक्रवर्ती , जैकी श्राफ, लिसा, पुरु राजकुमार
खूबसूरत निर्देशन, लाजवाब अभिनय, मनमोहक संगीत सजी फिल्म ‘वीर’ में वह सब कुछ है जो दर्शको को पसंद आएगा, खासतौर पर सलमान खान के फैंस को। निर्देशक अनिल शर्मा ने ऐतिहासिक कथानक को आज के दर्शक वर्ग और बॉक्स ऑफिस के गणित के हिसाब से इसे इस तरह से बुना है जिसमे भव्यता है, शानदार एक्शन है और बॉलीवुड स्टाइल के रोमांस के साथ सलमान का खास स्टाइल भी। एक तरफ पिंडारियों की शौर्यगाथा है तो दूसरी तरफ खूबसूरत प्रेम कहानी। अतीत के कालखंड पर बनीं फिल्मों से कुछ मामलों में फिल्म ‘वीर’ अलग है और कहानी से न्याय के साथ ही दर्शक के मनोरंजन के लिए भरपूर प्रयास किया गया है। कुछ लोगों को लग सकता है कि पटकथा को उतना गंभीर मोड़ देने में लेखक और निर्देशक चूक गए लेकिन ऐसा लगता है यह बहुत सोच समझकर खेला गया दावं है।
सलमान ने फिल्म की कहानी लिखी है जो १८६२ के कालखंड के आस पास की है। माधवगंढ़ का राजा ज्ञानेन्द्र (जैकी श्राफ ) अंग्रेजो के साथ है जो पिंडारियों के साथ धोखा करता है जिसमें बड़ी तादात में पिंडारी योद्धा मारे जाते है। इसी बीच पिंडारी समाज में वीर (सलमान खान) का जन्म होता जिसे उसके पिता प्रथ्वी सिंह (मिथुन) कुछ इस तरह से तैयार करते है कि वह एक शक्तिशाली नायक के रुप में उभरता है। दरअसल प्रथ्वी सिंह पिंडारियों के अपमान का बदला लेने की कसम लेते है और वीर अपने दद्दा की इस कसम को पूरा करने के लिए अंग्रेजो और माधवगढ़ के राजा से लोहा लेता है। इस बीच वह लंदन में अपने भाई (सोहेल) के साथ पढ़ाई करने भी जाता है जहां उसे पता चलता है कि अंग्रेज बहुत चालाकी से हिंदुस्तानी राजाओं की फूट का फायदा उठा रहे है। इस दौरान उसकी मुलाकात माधवगढ़ की राजकुमारी यशोधरा (जरीन खान) से मोहब्बत हो जाती है। एक तरफ वीर के दिल में प्यार की मदहोशी का खुमार है तो दूसरी तरफ माधवगढ़ के राजा से बदला लेने की तड़प। लेकिन वीर इस बीच न केवल अपने प्यार को पाने में कामयाब हो जाता है बल्कि पिंडारी समाज के अपमान का बदला लेने में भी सफल हो जाता है। इस महायुद्ध में वीर पिंडारी समाज के लिए शहीद हो जाता है । हालांकि वीर के शहीद होने के बाद राजकुमारी यशोधरा को जो पुत्र होता है वह बिल्कुल वीर जैसा ही दिखाया गया है।
फिल्म में जरीन खान अपनी मुस्कान और सौंदर्य के बल पर बेहतर नजर आई है। मिथुन दा ने पिंडारी योद्धा के रोल में जीवंत रोल किया है और खलनायक के रुप में जैकी श्राफ ने कम समय में उम्दा काम किया है। वीर के भाई के रुप में सोहेल खान ने खुशमिजाज चरित्र बेहद खिलंदड़ अंदाज में जिया है। साजिद -वाजिद ने फिल्म की पटकथा को ध्यान में रखते हुए बेहतर संगीत दिया है और गुलजार के लिखे बोल तो बेहद खूबसूरत है। फिल्म में कुछ संवाद इतने बेहतरीन है जो बॉलीवुड में लंबे समय बाद किसी फिल्म में इस तरह सुनाई पड़े है।
यह फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा और अभिनेता सलमान खान की सोच का कमाल है जिसमें ‘वीर’ को कुछ इस तरह से दिखाया गया है जो एक खास वर्ग के गुस्से और पीड़ा को अपनी तरह से अभिव्यकत करता है। वह जोशीला है, बहादुर है , प्रेम में डूबा है और अपनी बात का पक्का है। वह जब बोलता है तो विरोधी चुप हो जाते है और बाजुओं का दम ऐसा कि दुश्मन के शरीर से पांच सेर मांस खींच लेने में माहिर। आदर्श पुत्र, देश प्रेमी, वफादर प्रेमी के रुप में इस ‘वीर’ को देखना एक अलग अनुभव है और पीरियड फिल्म को बॉलीवुड के खास सांचे में बुना गया है। कुल मिलकार वीर एक ऐसी फिल्म है जो बॉक्स ऑफिस पर कमाई के मामलें में गदर मचा सकती है। कालखंड की कहानी को बॉलीवुड के खास अंदाज में देखने का अपना ही मजा है। लार्जर देन लाइफ के जिस चरित्र को फिल्म वीर में दिखाया गया है वह सलमान स्टाइल में आकर और भी बिंदास बन पड़ा है।
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