चंडीगढ़. ऐलनाबाद सीट पार्टी के कब्जे में आने के बाद इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला को एक बार फिर सत्ता करीब लगने लगी है और उन्होंने हुड्डा सरकार को गिराने के दांव-पेंचों का अध्ययन शुरू कर दिया है। चौटाला ने शनिवार को ऐलनाबाद चुनाव मंे छोटे बेटे अभय सिंह के जीत जाने के बाद सीधा संकेत दे दिया कि अब वे सरकार गिराने के पहलुओं की ओर विशेष ध्यान देंगे। उनका पहला काम दल-बदलकर कांग्रेस में शामिल हुए हरियाणा जनहित कांग्रेस के पांच विधायकों की सीट निरस्त कराना है।
इस मामले में तेजी से फैसला कराने के लिए चौटाला ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला कर लिया है। वह सुप्रीम कोर्ट से अपील करेंगे कि हरियाणा जनहित कांग्रेस से दल बदल कर कांग्रेस में शामिल हुए पांचों विधायकों के खिलाफ दल-बदल रोकथाम अधिनियम के तहत दायर मामले का फैसला टाइम-बाउंड हो। इस जीत से इनेलो के खुद के विधायकों की तादाद 31 हो जाने के बाद से चौटाला को संख्या-सूत्र के समीकरण संभव लगने लगे हैं।
उनके शब्दों में ‘इस परिणाम से निश्चित तौर पर राज्य की राजनीति मंे बदलाव आएगा। जब भी विपक्ष उपचुनाव जीतता है, प्रदेश की राजनीति में पर्वितन आता है।’
ऐलनाबाद में कांग्रेस प्रत्याशी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेने की सलाह देते हुए चौटाला ने मुख्यमंत्री हुड्डा से कहा है कि वह सम्मानीय तरीके से इस्तीफा दे दें क्योंकि आज की परिस्थितियाें में इसी में सरकार का हित है। चौटाला ने मांग की है कि हुड्डा फिर जनादेश हासिल करें ताकि राज्य की जनता को नए सिरे से सरकार बनाने का मौका मिल सके। जीत से उनकी पार्टी का हर कार्यकर्ता उत्साहित है और इस जीत से पार्टी को नई मजबूती मिली है।
उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को विश्वास हो गया है कि हुड्डा सरकार अब अधिक नहीं चलेगी। चौटाला ने दावा किया कि चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस ने हरसंभव कोशिश की जिसमें पैसे के बल पर वोट खरीदना भी शामिल है। चौटाला ने कहा कि राज्य में एक समान विकास का मुख्यमंत्री का नारा झूठा निकला क्योंकि सिरसा में एक भी पैसे का विकास कार्य नहीं हुआ और जनता ने इसका जवाब दिया है।










