जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार पर एक हजार रुपए की कॉस्ट लगाते हुए जवाब देने के लिए एक महीने का समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला और न्यायाधीश महेशचन्द्र शर्मा की खंडपीठ ने पूनमचंद भंडारी की याचिका पर यह कॉस्ट लगाई। इससे पहले नवंबर में सुनवाई के दौरान अदालत जवाब देने के लिए समय दे चुकी थी। 21 जनवरी को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता इन्द्रराज सैनी ने फिर समय मांगा तो खंडपीठ ने 1000 रु. कॉस्ट लगाकर एक महीने का समय दिया।
यह है मामला : याचिका 2005 में दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि 9 जनवरी 01 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 5 डीलरों को राशन के नीले केरोसीन को सफेद कर बेचते पकड़ा था। इसमें तत्कालीन जिला रसद अधिकारी समेत 30 अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी पाया था। ब्यूरो ने मुकदमा दर्ज किया, लेकिन सरकार ने चालान पेश करने की अनुमति नहीं दी थी। इस पर प्रार्थी ने याचिका दायर कर चालान की अनुमति देने को कहा था।
आरक्षण अवधि बढ़ाने पर रोक से इनकार : हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति और जनजाति को दिए जा रहे आरक्षण की अवधि बढ़ाने पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। साथ ही केन्द्र सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। संवैधानिक रूप से इन जातियों को दिए जा रहे दस साल के आरक्षण की अवधि सोमवार को समाप्त हो रही थी। इसे केन्द्र सरकार ने दस साल के लिए और बढ़ा दिया है।










