चंडीगढ़. देशभर में विकलांगों के कल्याण के लिए चल रहे कार्यक्रमों का असर यदि हरियाणा के पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट तक पहुंचा होता तो उसके एक कर्मचारी को राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय अवार्ड मिल गया होता और विभाग भी इस उपलब्धि पर इतरा सकता था।
पीडब्ल्यूडी की बीएंडआर शाखा के क्लर्क ओमप्रकाश का नाम अवार्ड के लिए भेजने में रोड़े अटकाने वाले विभाग के बाबुओं ने वित्तायुक्त के निर्देशों को भी धत्ता बता दिया। गणतंत्र दिवस के मौके पर ओमप्रकाश को राष्ट्रीय अवार्ड दिलाने के लिए वित्तायुक्त ने विभाग के प्रमुख अभियंता भी कई बार रिमांइडर दिए, लेकिन बाबुओं ने उनका जवाब ही नहीं दिया।
6 जुलाई 2009 को तत्कालीन मुख्य सचिव धर्मवीर ने मंडल आयुक्तों और डीसी को पत्र लिखकर 26 जनवरी 2010 को विकलांगों के कोटे से राष्ट्रीय अवार्ड देने के लिए नाम मांगे थे। इस पत्र के आधार पर ओमप्रकाश ने अपना नाम भेजने का दावा किया। वह 2003 में हुए एक हादसे में 10 फीसदी विकलांग हो गया था। तब भी उसे खुद को विकलांग सिद्ध करने के लिए धक्के खाने पड़े थे और लंबे समय बाद ही उसे रोकी गई सात इंक्रीमेंट मिल पाई थी।
मौजूदा मामले में विभाग आयुक्त ने चार नंवबर 2009 और 21 दिसंबर 2009 को रिमांइडर भेजकर मुख्य अभियंता से ओमप्रकाश के इलाज के बारे में पूछा 26 जनवरी 2010 को भेजे गए तीसरे रिमाइंडर में उसे अवार्ड देने के बारे में पूछा। ओमप्रकाश के मुताबिक विभाग के कुछ कर्मचारी नहीं चाहते कि उसे अवार्ड मिले। इसी वजह से उसका नाम ऊपर नहीं भेजी जा रहा। उसने वर्ष 2006 में भी अवार्ड के लिए आवेदन किया था। तब भी मामला विभागीय स्तर पर ही दब गया था।
अभी तक मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। अब पता कर ओमप्रकाश को राहत दी जाएगी।
महेश कुमार, इंजीनियर इन चीफ, पीडब्ल्यूडी











