सर्वर डाउन होने, टेस्ट नहीं खुलने या अन्य तकनीक कारणों से पिछले माह कैट की एक्जाम में कई बाधाएं आई थीं। इनमें जो छात्र परीक्षा नहीं दे पाए थे, वे शनिवार को फिर परीक्षा देने पहुंचे। इस बार कैट एक्जाम में कम्प्यूटर का माउस खूब दौड़ा। देरी को नजरअंदाज कर दें तो कोई बड़ी तकनीकी परेशानी नहीं आई।
इंदौर. तकनीकी कारणों से कॉमन एप्टीट्यूड टेस्ट (कैट) की परीक्षा से जो लोग वंचित हो गए थे, रविवार को उनमें से कई छात्रों ने दो शिफ्ट में परीक्षा दी। पहली शिफ्ट में परीक्षा शुरू होने में डेढ़ से दो घंटे की देरी हुई। इसके बाद दूसरी शिफ्ट में भी कुछ छात्रों का करीब 15 मिनट से आधे घंटे की देरी से एक्जाम शुरू हो पाई। रविवार को भी कैट दो शिफ्टों में सुबह 10 बजे और दोपहर 3.30 बजे होगी।
कैट के लिए शहर में एक्रोपोलिस कॉलेज को सेंटर बनाया गया है। परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रदेश के विभिन्न शहरों के साथ राजस्थान से भी छात्र आए थे। कोटा से आए छात्र तरुण शर्मा ने बताया वे पिछली बार 29 दिसंबर को स्वामी विवेकानंद कॉलेज में परीक्षा देने पहुंचे थे, पर तकनीकी कारणों से उनका टेस्ट स्क्रीन पर आगे नहीं बढ़ पाया था।
कम्प्यूटर हेंग हो गया था। उन्होंने 60 सवालों में से 40 हल किए। तरुण ने बताया उन्होंने एमबीए तो पहले ही कर लिया है अब वे इस परीक्षा के जरिये एफपीएम (फैलोशिप मैनेजमेंट प्रोग्राम) करना चाहते हैं। यह फैलोशिप पीएचडी के समान होती है। उनका मुख्य विषय एग्रीकल्चर है, जिसमें बहुत कम छात्र रुचि लेते हैं। जबलपुर के अनिकेत सिंह का बैच ही कैंसिल हो गया था।
करीब दो हफ्ते पहले उन्हें परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी मैट्रिक्स का एसएमएस मिला। नीमच के समीर ढींगरा भी तकनीकी कारणों से परीक्षा नहीं दे पाए थे। इसके बाद से वे परीक्षा को लेकर काफी परेशान और दुविधा में थे। इसी तरह अचल परिहार जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र हैं। कई दिनों तक दुविधा में रहने के बाद उन्हें भी परीक्षा का मौका दिया गया।
25 फीसदी छात्र नदारद रहे- एजुकेटर मनीष सराफ कहते हैं केट के लिए दोबारा ली जाने परीक्षा में करीब 25 फीसदी छात्र नदारद रहे। कैट में देरी होने के कारण कई छात्रों ने दूसरे एक्जाम के जरिये लक्ष्य बदल लिया।











