‘वेव्ज़’: यात्रा वृतांत से पंचतत्व तक
चंडीगढ़. सामाजिक संवेदना और घटनाओं से साहित्यकार और कलाकार अधिक प्रभावित होते हैं। इसकी स्पष्ट छाप उनकी रचनाओं और कलाकृतियों पर दिखाई देती है। इसका अनुभव मंगलवार को सेक्टर—10 स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी में ‘वेव्ज’ प्रदर्शनी को देखने पर हुआ। पेंटिंग और मूर्तिकला की यह प्रदर्शनी 5 फरवरी तक चलेगी।
11 मूर्तियां, 40 पेंटिंग
इसमें कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट की मास्टर ऑफ फाइन आर्ट की छह छात्राओं की पेंटिंग और मूर्तिकलाओं को प्रदर्शित किया गया है। इनमें 11 मूर्तियांे के साथ 40 पेंटिंग शामिल हैं। नवोदित कलाकारों ने पंचतत्व से लेकर पुरुष प्रधान समाज की औरत के बारे में सोच को दर्शाया है।
वैचारिक द्वंद्व
मनमीत कौर ने रॉयल एप्पल के माध्यम से समाज के एलीट वर्ग की तुलना की है। गोल्डन तारों से एप्पल बनाकर वैचारिक द्वंद्व दिखाया गया है। कुमारी अनुभा ने भगवान बुद्ध की पेंटिग ‘पांडारिका’ नाम से बनाई है। दूसरी पेंटिंग में कमल का फूल हाथ में लिए हुए बुद्ध को समाज में शांति का उपदेश देते दिखाया गया है। गीतिका पठानिया ने एल्यूमीनियम, तांबा, कांस्य और टेराकोटा के प्रयोग से अपनी कल्पना को मूर्ति की शक्ल में ढाला है। सुनीता राय ने मनुष्य की बुरी फिलिंग को एक्रेलिक और पेंसिल के सहयोग से बनाया है। वंशिका शर्मा ने मूर्ति कला और पेंटिंग में अपनी भावनाओं को साकार किया।
मूर्ति में आदिवासी महिला और भगवान बुद्ध को एनिमल फार्म में दिखाया गया है। सीमा ने अपनी पेंटिंग में रेल यात्राओं के अनुभवों को कैनवस पर ब्रश से उकेरा है। उन्होंने यात्रियों की मनोदशाओं का सजीव वर्णन किया है।










