मतदाता सूची पर फिर मचा बवाल
इंदौर. 21 फरवरी को होने वाले गुजराती समाज के चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर इस बार भी समाज के दोनों पैनल सक्रिय हो गए। चार साल से विवादित यह मुद्दा इस बार गरमा गया है। यहां तक कि एक पैनल के सदस्यों ने तो 5 दिसंबर 09 को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चर्चा की थी। इस पर श्री मोदी ने वडोदरा के सांसद बालकृष्ण शुक्ल को 6 दिसंबर को इंदौर भेजा था। यही नहीं इस संबंध में 14 जनवरी को समाज के सदस्य महापौर कृष्णमुरारी मोघे से मिले और उन्होंने मुख्यमंत्री से इन मुद्दों पर चर्चा की थी।
शहर में गुजराती समाज में लगभग 12000 सदस्य हैं। इनका नेतृत्व संघवी और गुजराती समाज रक्षा समिति करती हैं। समाज के चुनाव में इन दोनों पैनलों में कड़ी टक्कर होती है। समाज के संविधान के अनुसार चुनाव प्रतिवर्ष फरवरी में होते हैं, तीन साल से विवादों के चलते ये नियत समय पर नहीं हो सके।
गुजराती समाज रक्षा समिति की आपत्तियां
12000 सदस्यों में से 300-400 गैरगुजराती हैं।
कुछ मृतकों के अलावा कई नाबालिगों के नाम भी मतदाता सूची मंे शामिल हैं।
हाई कोर्ट के आदेश पर रजिस्ट्रार विभाग द्वारा की गई जांच में 20 मुद्दों पर आरोप तय हुए थे। इसमें मतदाता सूची पर भी आपत्ति ली गई थी।
सदस्यों से शुल्क 25 रु. जमा करने के लिए कहा गया। समिति की आपत्ति है कि पहले 6 रु. शुल्क था। इसे बढ़ाने के लिए रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी ने कोई स्वीकृति नहीं दी थी।
निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं हम
मतदाता सूची चुनाव प्रक्रिया से पहले जारी हो और चुनाव सरकार द्वारा करवाए जाएं। हमने हाई कोर्ट को 318 गैरगुजराती सदस्यों के नाम बताए थे। इस संबंध में हमने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चर्चा की है। -सरजीव पटेल,सहसंयोजक, गुजराती समाज रक्षा समिति
उनके पास 15 वोटर भी नहीं
इनके पास 15 गुजराती वोटर भी नहीं हैं इसलिए बेवजह आपत्ति ले रहे हैं। जिन लोगों को वे नाबालिग कह रहे हैं उनके जन्म प्रमाण-पत्र आदि सबूत लाकर दें तो हम उनके नाम हटा देंगे।-पंकज संघवी, सचिव, गुजराती समाज










