तीन साल में भी तय नहीं हो सका कंसलटेंट
भोपाल. विश्व बैंक की मदद से चल रही 1900 करोड़ रुपए लागत की वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना शुरू होने के तीन साल बाद कंसलटेंट नियुक्ति की कवायद चल रही है। वह भी बाकी सवा साल के लिए नहीं अगले चार सालों के लिए, जबकि विश्व बैंक ने परियोजना अवधि बढ़ाने का फैसला नहीं लिया है। यही नहीं कंसलटेंट चयन में इनकम टैक्स की गणना के मामले में वित्त विभाग से राय तक नहीं ली गई है। इनकम टैक्स को शामिल किए बिना प्रस्ताव को न्यूनतम मानने को पूर्व जस्टिस वीएन खरे और पूर्व नियंत्रक महा लेखापरीक्षक वीके शुंगलू ने अवैधानिक बताया है।
इस परियोजना में कंसलटेंसी के लिए चयन के लिए बचीं यूके की दो कंपनियों सीआईडीटी ने इनकम टैक्स समेत 13.12 करोड़ और स्पान ने बिना टैक्स राशि (करीब 16 लाख रुपए) शामिल किए 12.99 करोड़ रुपए का प्रस्ताव दिया। वित्त विभाग से सलाह लिए बिना स्पान को न्यूनतम मानकर उसे ही कंसलटेंट नियुक्त करने की कवायद चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक संस्था सीआईडीटी ने अपने स्तर पर पूर्व नियंत्रक महा लेखापरीक्षक वीके शुंगलू और पूर्व जस्टिस वीएन खरे से इस मामले में राय ली। उन्होंने टैक्स को जोड़े बिना राशि की गणना को अवैधानिक बताया है। मजेदार बात यह है कि स्पान के पास पर्याप्त स्टाफ तक नहीं है। जिस स्टाफ को प्रस्ताव में शामिल किया गया था, उसकी जगह नया स्टाफ दर्शाने की तैयारी हो रही है।
स्पान के डायरेक्टर केबी बंसल भी 17 दिसंबर 2009 को परियोजना संचालक पीके तिवारी को पत्र लिखकर काम नहीं करने की मंशा जता चुके हैं। लेकिन इस संस्था को कंसल्टेंट नियुक्त कर 50 फीसदी राशि 6.63 करोड़ रुपए पहले ही साल एडवांस में दिए जाने की तैयारी हो रही है।
लग चुके हैं गड़बड़ी के आरोप : सूत्र बताते हैं कि मूल कंपनी स्पान लेवनिन पर केरल मंे करीब 389 करोड़ के पावर प्रोजेक्ट में सौ करोड़ की अनियमितता का मामला कोर्ट में है।










