बीसीजी के खाली टीके भेजे
जोधपुर. स्वास्थ्य विभाग में टीकाकरण को लेकर बड़ी अनदेखी उजागर हुई है। जोधपुर जिले के लिए जयपुर से भेजी गई बीसीजी टीकों की खेप में डेढ़ लाख टीकों की वायल (शीशी) खाली आई है। खास बात यह है कि जोधपुर में भी बिना ध्यान दिए ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों की तादाद में खाली टीकों की आपूर्ति कर दी गई।
बुधवार को सीएमएचओ को जब इस मामले की जानकारी मिली तो वह वैक्सीनेशन स्टोर पहुंचे और पूरी जानकारी प्राप्त कर अपने उच्च अधिकारियों को इससे अवगत करवाया। सीएमएचओ डॉ. रमेश माथुर ने आरसीएचओ डॉ.नंदा चारण से जिले आपूर्ति किए गए टीके वापस मंगवाने के निर्देश दिए हैं।
अब अगली खेप आने तक जिले में बीसीजी टीकाकरण प्रभावित होने की आशंका बन गई है।
दो चरण में हुई आपूर्ति
वैक्सीनेशन डीपो जयपुर से दस जनवरी तक बीसीजी के डेढ़ लाख टीकों की आपूर्ति दो चरणों में हुई थी। सरकारी कम्पनी सिरम इंडिया इण्डस्ट्रीज पूना के जुलाई 09 में निर्मित टीकों की खेप का बैच नं. क्36सी9060 है।
जयपुर में बिना देखे इन टीकों की आपूर्ति जोधपुर कर दी गई। यहां भी किसी ने पैकिंग खोलकर ध्यान नहीं दिया। इनमें से 24 हजार टीकों की ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति भी कर दी गई।
स्टोर शहर में,ऑफिस गांव में जोधपुर का जिले का वैक्सीन स्टोर रेलवे स्टेशन रोड स्थित जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला में है।
यहां से पूरे जिले में टीकों की आपूर्ति की जाती है। जबकि संबंधित जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी (आरसीएचओ)का कार्यालय स्वास्थ्य भवन झालामण्ड में हैं। ऐसे में स्टोर पर आधिकारिक नजर रखना सम्भव नहीं है। यही कारण है कि यहां से बिना पड़ताल किए बीसीजी टीकों का वितरण कर दिया गया। जबकि आरसीएचओ कार्यालय को यहां शिफ्ट करने की कर्मचारी संगठन लम्बे समय से मांग भी कर रहे हैं।
सभी पैकेट जांचना संभव नहीं
सीएमएचओ डॉ. रमेश माथुर से बातचीत
भास्कर : क्या जिले में बीसीजी के खाली टीकों की आपूर्ति हुई है?
माथुर : हां, डेढ़ लाख खाली वायल आई है।
भास्कर : इस पर विभाग आगे क्या कर रहा है?
माथुर : वितरित खाली वायल मंगवा रहे हैं।
भास्कर : किसी ने यहां ध्यान क्यों नहीं दिया?
माथुर : सभी पैकेट खोलना सम्भव नहीं है। पूरी जांच की जा रही है।
भास्कर : किसी ने टीके की जगह सोल्यूशन का इंजेक्शन लगा दिया होगा तो?
माथुर : ऐसा होना नहीं चाहिए, किसी ने लगाया है तो कार्रवाई करेंगे।
तो क्या पानी के टीके लगाए?
टीबी से बचाने के लिए नवजात को बीसीजी का टीका लगाया जाता है। दस जनवरी के बाद जिले में 24 हजार खाली टीकों की आपूर्ति होने के बाद अब इस बात की सम्भावना जताई जा रही है कि टीकाकरण के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने बिना ध्यान दिए हमेशा की तरह वायल में पानीनुमा सोल्यूशन भर कर टीके लगा दिए होंगे तो उसका खामियाजा कौन उठाएगा? इसका खुलासा पूरे जिले से आने वाली रिपोर्ट में होगा।



