कमरों पर ताले मरीज परेशान
अम्बाला.शुक्रवार को कैंट सिविल अस्पताल में डाक्टरों का अटेंडेंस बोर्ड कुछ ऐसा ही दर्शा रहा था। पूरे ओपीडी वार्ड में सिर्फ हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. विजय बंसल ही मौजूद थे। स्त्री रोग विशेषज्ञ के कमरे को छोड़कर सभी विशेषज्ञों के कमरे बंद थे। जाहिर है वैकल्पिक व्यवस्था न होने से मरीजों को परेशानी होना लाजिमी था।
एक ही दिन में ज्यादा डाक्टरों के छुट्टी या मीटिंग में जाने से व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ा गई। पिछले कुछ महीनों में ही कैंट सिविल से पांच स्पेशलिस्ट डाक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं। इनमें फिजिशियन, गाइनोक्लॉजिस्ट, आई स्पेशलिस्ट, मनोविशेषज्ञ व ईएनटी स्पेशलिस्ट शामिल हैं। पांच डाक्टरों के बदले अस्पताल को सिर्फ एक डाक्टर (चाइल्ड स्पेशलिस्ट) ही मिला है।
आई स्पेशलिस्ट के नौकरी छोड़ने के बाद अब यहां सिर्फ शनिवार के दिन ही स्पेशलिस्ट की सेवाएं मिल पाती हैं। अस्पताल में थोड़ा सा भी सीरियस केस आ जाए उसे तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। 75 बिस्तर की क्षमता वाले अस्पताल में डाक्टरों के 11 पद स्वीकृत हैं मगर सिर्फ सात डाक्टर ही हैं। यहां रोजाना 300 मरीजों की ओपीडी है मगर डाक्टरों के अभाव में यह घटती जा रही है।
अस्पताल में भटकते रहे मरीज
बुखार से पीड़ित चार वर्षीय बेटे को अस्पताल लेकर आई महेशनगर की कविता ने बताया कि अस्पताल में आकर पता चला कि डाक्टर ही नहीं है। अब 10-12 किलोमीटर दूर सिटी सिविल अस्पताल ले जाना मुश्किल है। वहीं 12 क्रास रोड की 65 वर्षीय संतोष को अपने कानों की जांच करवानी थी मगर डाक्टर न होने की वजह से पर्ची ही नहीं बनी। इसी तरह बोह गांव के अमरनाथ भी डाक्टर न होने से परेशान रहे।
डाक्टर्स के एग्ज़ाम चलने की वजह से भी कुछ डाक्टर्स ने छुट्टी ली है। फिलहाल अस्थाई व्यवस्था करते हुए कैंट सिविल में दो डाक्टर्स डिपुट करने के निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति ठीक हो जाएगी। -डा. नरेंद्र चौधरी, सीएमओ, अम्बाला।










