चुनाव को लेकर हॉस्टल में हंगामा
सागर. डॉ.हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में शुक्रवार की रात विवेकानंद हॉस्टल के एक छात्र की पिटाई के बाद छात्रों के बीच तलवारें खिंच गईं। आसपास स्थित दोनों हॉस्टल में रहने वाले कथित छात्रों के बीच पत्थरबाजी भी हुई।
जब तक पुलिस और वार्डन आदि पहुंचते तब तक मारपीट करने वाले छात्र भाग चुके थे। दो घंटे तक हुए हंगामे का नाटकीय अंत हुआ। न तो पिटने वाले छात्र ने एफआईआर कराई और न ही पीटने वाले छात्रों को पुलिस पकड़ पाई।
घटना की शुरूआत एनएसयूआई के विवि परिक्षेत्र अध्यक्ष चुनाव में हार-जीत को लेकर हुई। जीतने वाला उम्मीदवार विवेकानंद हॉस्टल का छात्र प्रशांत मिश्रा था। हारने वाला उम्मीदवार टैगोर हॉस्टल का छात्र अब्दुल कादिर काजी था।
रात 8 बजे ज्यादातर छात्र अपने-अपने हॉस्टल में थे। विवेकानंद हॉस्टल में अचानक पत्थर फिकने लगे। छात्रों के चिल्लाने की आवाज आने लगीं। घबराए छात्र बाहर निकले। यहां उनका साथी एक छात्र पिट रहा था।
छात्रों को आता देख मारपीट करने वाले तीन छात्र भाग गए। इनमें दानेश और अंशुल नामक छात्रों के नाम सामने आए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही सिविल लाइन थाना प्रभारी नवल आर्य पुलिस बल के साथ हॉस्टल पहुंचे।
मारपीट करने वाले छात्र अपने कमरों में घुस गए और विवेकानंद हॉस्टल के छात्र मुख्य गेट पर एकत्र हो गए। पुलिस ने गेट पर खड़े छात्रों से पूछताछ की और टैगोर हॉस्टल में पहुंचकर मारपीट करने वाले छात्रों को खोजने लगी।
इस बीच वार्डन और चीफ वार्डन आए। इन्होंने थोड़ी देर छात्रों से चर्चा की लेकिन संतोषप्रद जवाब दिए बिना टैगोर हॉस्टल जाने लगे। यह देख छात्रों ने शोर मचाना शुरू कर दिया।
दवाब में आया पिटने वाला छात्र
पिटने वाला छात्र डरा एवं सहमा हुआ था। मीडियाकर्मियों से वह कह रहा था कि उसका नाम प्रकाशित न करें। नहीं तो उसकी बदनामी हो जाएगी। छात्र यह निर्णय भी नहीं ले पा रहा था कि मारपीट करने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर लिखाएं या नहीं।
हालांकि पुलिस ने उसे भरोसा दिलाया कि वह निडर होकर एफआईआर कराए,कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। लेकिन शायद पिटने वाले छात्र को पुलिस की इस बात पर भी भरोसा नहीं हो पाया। अंतत: रात 10 बजे बिना एफआईआर कराए यह छात्र अपने हॉस्टल चला गया।
इनकी भूमिका को लेकर चर्चा
घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई छात्रों के बीच चर्चा का विषय रही। पिटने वाला छात्र और पिटाई कराने में शामिल एक छात्र पुलिस की गिरफ्त में थे। फिर भी दो अन्य आरोपी छात्रों को पुलिस नहीं पकड़ पाई। वह पिटाई कराने वाले छात्र से ही कह रही थी कि तुम्हारे दोनों साथियों को बुलाओ।
यहां तो ठीक पिटने वाले छात्र के सिर पर चोट के निशान स्पष्ट दिखाए दे रहे थे, लेकिन घटना के दो घंटे बाद भी उसका मुलाहजा नहीं कराया गया। चीफ वार्डन और अन्य वार्डन सहित वहां उपस्थित छात्र कल्याण अधिष्ठाता भी पुलिस की हां में हां मिलाते देखे गए। क्या इस प्रकार की कार्रवाई से कोई पिटने वाला छात्र एफआईआर कराने के लिए हिम्मत जुटा पाएगा?










