Sunday, Feb 7th, 2010, 1:03 am [IST]  
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danik bhaskarभवन निर्माण की समयसीमा खत्म

भास्कर न्यूज

शिमला. शहर में भवन निर्माण के लिए अब दो साल की समयसीमा खत्म कर दी है। इससे नगर निगम की परिधि में आने वाले भवन निर्माताओं को नक्शा पास करवाने के लिए बार-बार निगम कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। लोग अपनी आर्थिक हालात को देखते हुए निर्माण का समय बढ़ा सकेंगे। वहीं कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे निगम की वास्तु शाखा में भी हर साल नक्शे स्वीकृत कराने वालों का तांता नहीं रहेगा। प्रशासन को उम्मीद है कि नगर निगम अधिनियम की धारा 251 के खत्म होने से शहरवासियों और निगम दोनों को ही सहूलियत होगी।



अभी तक लोगों को शहर में निर्माण शुरू करने पर निगम से भवन का नक्शा स्वीकृत कराना पड़ता है। नक्शा दस शर्तो पर स्वीकृत होता है। मुख्य शर्त इयही है कि नक्शा स्वीकृत होने के एक वर्ष के अंदर निर्माण कार्य शुरू करने के बाद दो साल में इसे पूरा करना होगा। दो साल की अवधि में भवन निर्माण पूरा न कर पाने की स्थिति में उसे निगम एक साल की अनुमति देता है और यह क्रम इसी प्रकार चलता रहता है। ऐसी स्थिति में शहरवासियों को हर साल निर्माण की समय सीमा बढ़ाने के लिए निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे। वास्तु शाखा में हर साल समय सीमा बढ़ाने के लिए सैकड़ों मामले पहुंचते हैं जिससे निगम का समय इसी काम में नष्ट होता था।



नगर निगम अधिनियम की धारा 251 खत्म होने से शहरवासियों को केवल एक बार ही नक्शा स्वीकृत कराना होगा। दो साल की अवधि में निमार्ण पूरा न हो पाने की स्थिति में समय अवधि बढ़ाने की दरकार नहीं रहेगी। ऐसे में कोई भी शहरवासी एक बार नक्शा स्वीकृत होने के बाद अपनी प्राथमिकताओं और आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए भवन निर्माण कर सकेगा। नगर निगम के कार्यवाहक सहायक आयुक्त जोगेंद्र चौहान का कहना है कि नगर निगम अधिनियम की धारा 251 खत्म होने से निगम और शहरवासी दोनों को राहत मिलेगी। उनका कहना है कि इससे लोगों को अपना मकान अपनी मर्जी और आर्थिक हालत के अनुरूप करने की छूट मिलेगी।



15 दिन में गिराने होंगे ढारे



नगर निगम ने अवैध निर्माण पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। निगम प्रशासन ने वीरवार को एक ढारा गिराया जबकि दो अन्य ढारों पर ताला लगा होने के कारण 15 दिन के अंदर ढारे हटाने का नोटिस दिया है। जाखू में तोड़ा गया ढारा किसी सेवानिवृत्त उच्चधिकारी का बताया जाता है जबकि दो अन्य मामले भी कोर एरिया के हैं।



आयुक्त की कोर्ट में चल रहे अवैध निर्माण पर आयुक्तने यह निर्णय दिया है। पिछले कई सालों से लंबित चल रहे मामलों को निपटाने में निगम प्रशासन ने काफी गति पकड़ी है। अगर हर साल का औसतन आंकड़ा देखा जाए तो निगम कोर्ट से करीब चार या पांच मामले ही निपटा पाता था, लेकिन एक साल की अवधि में निगम 70 से अधिक कोर्ट मामलों को निपटा चुका है। से बिजली पानी की सुविधा काटने के निर्णय को सदन की सहमति न मिल पाने के कारण देरी हो रही है।

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