डॉ. राम राजेश मिश्रा रादुविवि के नए वीसी
जबलपुर. विश्वविद्यालय में सप्ताह भर से चल रहा इंतजार उस वक्त खत्म हो गया जब राजभवन से आधिकारिक कुलपति की घोषणा सम्बन्धी फैक्स आया जो कि देर शाम विश्वविद्यालय पहुंचा, जिसमें कुलाधिपति रामेश्वर ठाकुर ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के आधिकारिक कुलपति के रूप में उज्जैन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. राम राजेश मिश्रा का नाम घोषित किया। डॉ. मिश्रा सप्ताह भर में अपना कार्यभार संभाल लेंगे। आधिकारिक कुलपति के नाम की घोषणा होते ही उन लोगों के चेहरे मुरझा गए जो कुलपति की कतार में खड़े गद्दी पाने का सपना देख रहे थे।
ज्ञातव्य है कि 31 जनवरी को पैनल में 5 नामों का निर्धारण होते ही कई नामों पर चर्चाएं हो रही थीं और लोग लिफाफा खुलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। एक-एक दिन बीतने के साथ ही चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो रहा था मगर शनिवार की देर शाम इस राज से पर्दा उठ ही गया और कुलाधिपति ने कुलपति के नाम की घोषणा कर दी। कुलाधिपति ने 5 नामों के पैनल में से उज्जैन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. राम राजेश मिश्रा का नाम चयनित किया।
सूत्रों ने बताया कि अन्य नामों में जबलपुर के हवाबाग महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. आलोक चंसौरिया, आईआईटी कानपुर के रसायन शास्त्र के प्रोफेसर डॉ. भगवान दास गुप्ता व बनारस के डॉ. गजेन्द्र सिंह के साथ ही प्रदेश के बाहर के प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार का नाम भी शामिल था।
पिछड़ गया जबलपुर- कुलपति बनने की रेस में स्थानीय व्यक्ति के पिछड़ जाने से विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण दुखी हैं। सम्भावना जताई जा रही है कि इस पिछड़ाव की वजह कहीं न कहीं राजनैतिक हस्तक्षेप की अटकलें हैं। सूत्रों ने बताया कि यही मुख्य वजह है कि आईआईटी कानपुर के रसायनशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. भगवानदास गुप्ता ने स्वयं ही विश्वविद्यालय का कुलपति न बनने की इच्छा कुलाधिपति से जाहिर की थी। वहीं पैनल में विश्वविद्यालय के कार्यकारी कुलपति डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव का नाम शामिल न होना भी कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है।










