500 रु. में बन गया संस्था का अध्यक्ष!
इंदौर. सबसे आखिरी में बना सदस्य सीधे संस्था का अध्यक्ष बन गया वह भी महज 500रुपए जमा कर। इस कारनामे का खुलासा हुआ है शनिवार को। सहकारिता विभाग द्वारा जारी कविता गृहनिर्माण संस्था की सदस्यता सूची में सबसे आखिरी नाम सदस्य क्र. १२७३ पप्पूसिंह हिंदूसिंह परमार का है। वह 2007 में संस्था का सदस्य बना और मात्र 16 माह बाद संस्था का अध्यक्ष भी बन गया।
सहकारिता विभाग ने शनिवार को कविता व इंदौर विकास गृहनिर्माण संस्था की सदस्यता सूची जारी की। 1273 सदस्यों वाली कविता गृहनिर्माण की दो कॉलोनियों पाश्र्वनाथनगर और स्कीम-११४ में मौजूद जमीन के लिए यह सूची जारी की है। इसमें सबसे आखिरी नाम पप्पू परमार का है।
उसे संस्था का सदस्य बनाने के लिए प्रस्ताव 30 जून 2006 को हुआ था।
उसने 21 नवंबर 2007 को 500 रुपए जमा कर संस्था की सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद 2009 में ही वह संस्था का अध्यक्ष बन गया। पप्पू ने सदस्यता के समय जमा कराए ५क्क् रुपए शुल्क के अलावा एक पैसा भी खाते में जमा नहीं किया। फिलहाल उस पर 137560 रुपए, आईडीए का शुल्क और पेनल्टी बाकी है।
बकायादार होने के बाद भी सदस्यता सूची में उसका नाम स्कीम ११४ में प्लॉट के लिए आईडीए को भेजी सूची में बताया गया है। संस्था के ऑडिट नोट में संस्था के वर्तमान अध्यक्ष व संचालकों द्वारा कोई भी गड़बड़ी सामने नहीं आई है।
खुद ही को नहीं मालूम किस तरह मिली सदस्यता
संस्था अध्यक्ष पप्पू परमार अपनी सदस्यता को लेकर असमंजस में है। भास्कर ने जब सदस्यता के बारे में बात की तो उन्होंने बताया मैं मार्च 2009 में संस्था के सदस्य बना और उसके बाद संचालक मंडल में शामिल हो गया। जब परमार से पूछा गया कि आपकी सदस्यता किस तरह से हुई तो उनका कहना था कि इस बारे में मुझे कुछ भी जानकारी नहीं है।
3 फरवरी तक दे सकेंगे दावे-आपत्ति
कविता गृहनिर्माण के सदस्य इस सदस्यता सूची पर 1३ फरवरी तक दावे-आपत्ति सहकारिता विभाग में दर्ज करा सकेंगे। इसके साथ ही विभाग ने स्कीम १३३ से मुक्त हुई ९२ सदस्यों वाली संस्था इंदौर विकास गृहनिर्माण की सदस्यता सूची भी प्रकाशित की। इस सूची पर सदस्य १२ फरवरी तक दावे-आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।










