रात 12 बजे हुआ फैसला
सागर. जिला पंचायत के वार्ड क्रमांक सात का चुनाव परिणाम रोके जाने के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने शनिवार को रात 12 बजे तक कलेक्ट्रोरेट कार्यालय परिसर में धरना दिया। वार्ड के दो मतदान केंद्रों में डाले गए मतपत्रों का भौतिक सत्यापन कराने के बाद प्रशासन ने देर रात कांग्रेस समर्थित उर्मिला पति शैलेंद्र श्रीवास्तव को विजयी घोषित कर प्रमाण पत्र दे दिया गया।
चुनाव परिणाम की घोषणा होते ही धरना में शामिल नेता सुरखी विधायक गोविंद्र सिंह राजपूत के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। चुनाव परिणाम रोके जाने के विरोध में ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष हीरासिंह राजपूत के नेतृत्व में सागर और राहतगढ़ से बड़ी संख्या में आए कांग्रेस नेता शाम से ही कलेक्टर कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर नारेबाजी करने लगे थे । कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव का कहना था कि चुनाव परिणाम को लेकर आपत्ति आई है राज्य निर्वाचन आयोग ने रिपोर्ट मांगी है जो भेज दी गई है मामला आयोग में विचाराधीन है । आयोग से निर्देश मिलने पर वस्तु स्थिति स्पष्ट होगी।
रात 8 बजे कलेक्टर ने बताया कि आयोग के निर्देश पर वार्ड क्रमांक 7 के मतदान क्रमांक 25 और 124 में डाले गए मतों का भौतिक सत्यापन कराने के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा। मतों का भौतिक सत्यापन कराए जाने के विरोध में रात 9 बजे से कांग्रेस नेता दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए।
प्रशासन ने मतों का भौतिक सत्यापन कराने के लिए राहतगढ़ से दोनों मतदान केंद्रों की मतपेटियां बुलाइर्ं । सभाकक्ष में कलेक्टर की उपस्थिति में मतपत्रों का मिलान किया गया। रात 12 बजे जानकारी मिली कि मतदान केंद्र क्रमांक 24 से उर्मिला पति शैलेंद्र श्रीवास्तव को 237 और लीलावती पति अशोक चौधरी को 257 मत मिले थे। दूसरे मतदान केद्र क्रमांक 124 से उर्मिला को 291 और लीलावती को मात्र 97 मत मिले। मतगणना के आधार पर उर्मिला को विजयी घोषित किया गया।
धरना देने वालों में ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत के अलावा पूर्व विधायक सुनील जैन, वकील अनिल सिंह, सुभाष भाई, देवेंद्र फुसकेले, कमलेश बघेल, अतुल नेमा, पम्मा पठान, पंडित मदन गोपाल नगाइच सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल थे ।
घनघनाते रहे मोबाइल
चुनाव परिणाम को लेकर भाजपा और कांग्रेस में जिज्ञासा का वातावरण बना हुआ था। जो नेता धरने में शामिल नहीं हुए थे वे मोबाइल पर अपने साथियों से पूछते रहे कि फैसला क्या हुआ है ? भाजपा नेता भी एक-दूसरे से जानकारी लेते रहे। यहां तक कि राहतगढ़ के लोग भी फैसले का इंतजार कर रहे थे। देर रात तक अखबार के दफ्तरों में मोबाइल और टेलीफोन की घंटियां घनघनाती रहीं। परिणाम सुनते ही समर्थकों के चेहरे खिल उठे।










