Monday, Feb 8th, 2010, 12:37 am [IST]  
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danik bhaskarमहंगाई आश्वासनों के भरोसे कम नहीं होगी

भास्कर

बेतहाशा बढ़ती महंगाई से बेहाल आम आदमी को जल्दी ही कोई राहत मिल सकेगी, ऐसी आशा करना शायद व्यर्थ है। शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा आहूत मुख्यमंत्रियों की बैठक में महंगाई नियंत्रित करने और गरीबों को राहत देने के लिए कुछ बड़े कदम अपेक्षित थे। किंतु ऐसा होने के बजाय वही हुआ, जिसके लिए सरकारें जानी जाती हैं - एक और समिति बनाना। मुख्यमंत्रियों की समिति और महंगाई कम होने के आश्वासन के बूते प्रधानमंत्री चाहते हैं कि जनता राहत महसूस करे, तो यह एक क्रूर मजाक है।



इस मुद्दे पर लगातार आलोचना झेल रही केंद्र सरकार पिछले महीनों में ऐसी कोई भी ठोस कार्रवाई करने में विफल रही है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें कम हो सकें। केंद्र में पिछले साल कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के चुने जाने के तुरंत बाद से ही मुद्रास्फीति की दर लगातार बढ़ रही है और लोगों का जीवन दूभर होता जा रहा है। सब्जी-भाजी से लेकर दाल-चावल, शक्कर आदि सभी वस्तुएं महंगी होती जा रही हैं, पर यूपीए सरकार में शामिल कांग्रेस व उसके सहयोगी दल कीमतें कम करने में लगातार नाकाम हो रहे हैं।



प्रधानमंत्री ने आशा जताई है कि खाद्यान्न की कीमतें कम होंगी। ऐसी आशा केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भी पहले कई बार व्यक्त कर चुके हैं। लेकिन वे न तो महंगाई का कोई ठोस कारण बता सके हैं और न ही देश को जानकारी दे पाए हैं कि महंगाई कब तक कम हो पाएगी। शरद पवार जैसा असफल कृषि मंत्री देश ने पिछले कई वर्षो में नहीं देखा है। पवार अलग-अलग समय पर अलग-अलग हास्यास्पद राजनीतिक बयान देकर देश को दिग्भ्रमित कर चुके हैं। ऐसे में उनसे किसी तरह की आशा करना व्यर्थ होगा।



प्रधानमंत्री का यह बयान कि ‘बुरा समय बीत चुका है और अब हालात सुधरेंगे’ को कितनी गंभीरता से लिया जाएगा, इस पर शंका है। प्रधानमंत्री ने देश में प्रचलित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में कमियों को माना है। यही बात कई दिनों से राज्यों के मुख्यमंत्री भी कह रहे थे, लेकिन उनकी तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। मध्यप्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र को बढ़ती महंगाई के लिए यदि लगातार दोषी ठहराया है, तो इसमें राजनीति देखने के बजाय यूपीए को वस्तुस्थिति का सामना करने का साहस दिखाना चाहिए और त्वरित, ठोस व परिणाममूलक कार्रवाई करनी चाहिए।

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