धूल उगलती खदान ने चैन छीना
इंदौर. शहर से मात्र डेढ़ किमी दूरी बिचौली-मर्दाना में मुरम-गिट्टी की खदान पर प्रदूषण नियंत्रण के कोई उपाय नहीं हैं। खदान से उड़ने वाली धूल रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं हंै। खनिज विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। खदान के कारण गांव के लोग दिन का चैन और रात की नींद खो चुके हैं।
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों की यहां धज्जियां उड़ रही है। उत्खनन कार्य खुले में हो रहा है। धूल से पूरा गांव परेशान है। हरियाली का दिखावा : खदान के आसपास खदान संचालक को पौधारोपण करना अनिवार्य है, लेकिन खदान मालिक ने दिखावे के लिए ट्री-गार्ड लगाए हैं जिनमें पौधों का नामोनिशान नहीं है।
कलेक्टर को भी की शिकायत : रहवासी पुलिस व खनिज विभाग को कई बार शिकायत कर चुके हैं पर कुछ नहीं हुआ। शनिवार को ग्रामीण कलेक्टर से भी मिले थे, कलेक्टर ने उन्हें एसडीओ मनोज पुष्प के पास भेज दिया था। एसडीओ ने उन्हें जांच का आश्वासन दिया था।
शीशे लगाने की हिम्मत ही नहीं होती
खदान के आसपास बसी कॉलोनियों के लोग इससे त्रस्त हैं। यहां मौजूद मकानों की हालत यह है कि दीवारों में तीन-तीन इंच की दरारें आ गई हैं। खदान में होने वाली ब्लास्टिंग के कारण घरों के शीशे लगाते ही टूट जाते हैं। यहां रहने वाले राजीव भाटिया के घर के शीशे तो आए दिन टूटते ही रहते हैं। श्री भाटिया का कहना है कि हम घर के शीशे बदल-बदल कर परेशान हो चुके हैं। समझ में नहीं आता कि क्या करें।
मुझे इस खदान की जानकारी मिली है। मैं जांच करवाऊंगा कि वहां प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी उपकरण मौजूद हैं या नहीं। खदान के कारण यदि प्रदूषण फैल रहा होगा तो हम खदान बंद करवाएंगे।-अच्युतानंद मिश्र, संयुक्त संचालक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
इस खदान की लीज राज्य सरकार ने दी है। खदान के बारे में ग्राम पंचायत को कोई शिकायत नहीं है, फिर भी यदि किसी ने शिकायत की है, तो हम उसकी जांच करवाएंगे। एक-दो दिन में जांच कर रिपोर्ट सौंप देंगे।-संजय लुणावत, प्रभारी, खनिज अधिकारी











