पैकेज से विकास साफ नजर आना चाहिए
सागर. केंद्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड के विकास के लिए मिले 3260 करोड़ रुपए के विशेष आर्थिक पैकेज से प्रस्तावित कार्यो की डीपीआर तैयार करने संबंधी बैठक रविवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश के विकास विभाग के प्रमुख सचिव आर परशुराम ने कहा कि हमें बुंदेलखंडवासियों के जीवन स्तर में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का एक खास अवसर मिला है। हमें इस पैकेज का उपयोग ऐसे स्थाई विकास कार्यों में करना है जो आगे जाकर साफ दिखाई दे।
15 फरवरी के बाद मिलंगे क्रियान्वयन के निर्देश
प्रमुख सचिव ने कहा कि विशेष पैकेज के अंतर्गत योजनाओं की डीपीआर 15 फरवरी को केंद्र सरकार के संबंधित विभाग को प्रस्तुत कर दी जाएंगी। डीपीआर मिलते ही केंद्र सरकार द्वारा विकास योजनाओं संबंधी मार्गदर्शन कभी भी जारी हो सकते हैं। इसलिए हमें पूरी तैयारी रखनी है।
पैकेज से विकास साफ नजर आना चाहिए
अपनी जमीन मानकर भुगतान करें
बैठक में शामिल हुए सागर संभाग के कमिश्नर,कलेक्टर,सीईओ एवं दतिया कलेक्टर को संबोधित करते श्री परशुराम ने कहा कि भूमि का अधिग्रहण करने से पूर्व उसकी कीमत का निर्धारण स्वयं की जमीन मानकर करें यानी अगर आप वह जमीन शासन को सौंपते हैं तो उसकी क्या कीमत लेते?उन्होंने कहा कि जमीन अगर कृषि योग्य है तो उसकी फसल कटने के 20 दिन के भीतर भुगतान कर जमीन का अधिग्रहण कर लिया जाए। बैठक में ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, कृ़षि विभाग, पशुपालन विभाग, उद्यानिकी, वन विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव, विभाग प्रमुख भी मौजूद थे।
कमिश्नर का वादा
कमिश्नर एसके वेद ने कहा कि वह संभाग के सभी अधिकारियों की ओर से विश्वास दिलाते हैं कि शासन ने यहां के शासकीय सेवकों पर जो भरोसा कायम किया है। उसे कायम रखा जाएगा।
मनरेगा के कार्य दिवस बढ़ाए जाएं
बैठक में मौजूद अन्य अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन संबंधी कुछ बिंदुओं पर चर्चा की। जिसमें बताया गया कि क्रियान्वयन के संबंध में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश लागू रहेंगे।
एक विभाग की राशि दूसरे विभाग को नहीं दी जाएगी। प्रशासकीय विभाग अपनी आवश्यकता के मुताबिक अपनी कार्यपद्धति निर्धारित कर सकेंगे। सभी जिलों की विकासात्मक परिस्थतियां अलग-अलग हैं।
इसलिए प्राथमिकता का क्रम तैयार कर कार्य किए जाएंगे। मनरेगा में 100 दिन से अधिक का रोजगार देने का प्रावधान किया जाए। एक स्थान पर एक ही एजेंसी से परियोजना पूरी कराई जाए। सभी योजनाओं में श्रमिकों के भुगतान में एकरूपता का पालन किया जाए।
कब क्या मिला
एमपी का बीडीए
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिए शिवराज सरकार ने बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण का गठन किया। गठन का नोटिफिकेशन 11 मई 2007 को जारी हुआ। इसके पहले अध्यक्ष खरगापुर के सुरेंद्र प्रताप सिंह बेबी राजा पूर्व संसदीय सचिव बनाए गए। प्राधिकरण में एक अध्यक्ष, तीन उपाध्यक्ष और पांच सदस्य के पद हैं।
ओरछा में बैठक
भारत सरकार ने नरेगा के तहत एमपी यूपी के बुंदेलखंड के विकास के लिए तैयार किए गए पायलेट प्रोजेक्ट की एक प्रमुख बैठक 13 अक्टूबर 2009 को ओरछा में आयोजित की।
केंद्रीय ग्रामीण विभाग के राज्य मंत्री प्रदीप जैन की उपस्थिति में हुई बैठक में उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर उत्तरप्रदेश के अधिकारी नहीं पहुंचे थे।
यह माना गया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी के बुंदेलखंड के विकास के सपने पर पानी फेरने के उद्देश्य से मायावती ने ऐसा किया।
नवंबर में मिला पैकेज
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20 नवंबर 2009 को उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे के निवारण और व्यापक समन्वित विकास के लिए 7266 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज को मंजूरी दी। यह पैकेज यूपी के 7 जिलों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा तथा मध्यप्रदेश के 6 जिलों छतरपुर, दमोह, दतिया, सागर, पन्ना, टीकमगढ़ के लिए स्वीकृत किया गया। 7 हजार करोड़ में से 4 हजार करोड़ रुपए यूपी को तथा मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड को 3760 करोड़ रुपए मिले हैं।
कब क्या मिला..
योजना राशि का आधा हिस्सा पहले से चल रहीं विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में समाहित किया जाएगा। जबकि 3450 करोड़ रुपए अगले तीन साल में तीन हिस्सों में मप्र और उप्र सरकार को उपलब्ध कराए जाएंगे।
विशेष पैकेज के लिए पन्ना में मंथन - 19 जनवरी को मध्यप्रदेश में अपने दौरे में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने बुंदेलखंड में विकास नहीं होने के लिए शिवराज सरकार को दोषी बताया।
इसके अगले दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना विभाग की समीक्षा की और प्रमुख अफसरों को बुंदेलखंड के 6 जिलों के लिए अलग-अलग प्रोजेक्ट बनाने के निर्देश दिए।
इसके पालन में 21 जनवरी को योजना विभाग के प्रमुख सचिव देवेंद्र सिंघई की अध्यक्षता में बुंदेलखंड के पांचों जिलों के प्रमुख अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई।
पन्ना का मॉडल प्लान
पन्ना में आयोजित बैठक में जिले के विकास की रूपरेखा तय की गई। इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार को भेजा जाना है। इसे मंजूरी मिलने पर इसी के आधार पर सागर, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर और दतिया जिलों के प्रोजेक्ट तैयार करके केंद्र को भेजे जाएंगे।
केंद्र ने दिया बुंदेलखंड को विशेष दर्जा
केंद्र सरकार ने 2 फरवरी 2010 को बुंदेलखंड को कृषि संबंधी कार्यो के लिए विशेष क्षेत्र का दर्जा दिया। इसमें एमपी और यूपी दोनों प्रदेशों के 13 जिले शामिल हैं।
इस क्षेत्र में लगातार पड़ रहे सूखे को ध्यान में रखते हुए यह प्रावधान किया गया। केंद्र सरकार केंद्रीय योजनाओं के अंतर्गत कृषि पर होने वाले खर्च का 90 फीसदी खर्च खुद वहन करेगी जबकि 10 फीसदी राशि राज्य सरकार को देनी होगी। बुंदेलखंड में 80 फीसदी जनता कृषि पर आधारित है। जिसमें 60 फीसदी छोटे किसान हैं।










