समय पर रिजल्ट नहीं मिलने से छात्र परेशान
दुर्ग. शिक्षा व्यवस्था के प्रति सरकारी तंत्र की उदासीनता का इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है कि समय पर परीक्षा और उसके नतीजों की घोषणा के लिए खुद छात्र-छात्राओं को यूनिवर्सिटी पर दबाव बनाना पड़ता है।
प्रदेशभर में फिजियोथेरेपी शिक्षा का यही हाल है। सालभर ईमानदारी से पढ़ाई करने के बाद फिजियोथेरेपी के स्टूडेंट्स को पहले परीक्षा लेने और बाद में नतीजे घोषित कराने के लिए अगले छह महीने तक यूनिवर्सिटी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं तब कहीं जाकर यूनिवर्सिटी के अधिकारियों की तंद्रा भंग होती है। लेकिन तब तक स्टूडेंट्स कोर्स अवधि से सालभर पिछड़ चुके होते हैं।
ताजा जानकारी के अनुसार प्रदेशभर में फिजियोथेरेपी कोर्स के वर्ष 2005, 06 और 2007 के 5 सौ से अधिक स्टूडेंट्स निर्धारित समयावधि से एक साल पीछे चल रहे हैं। स्टूडेंट्स का कहना है कि यूनिवर्सिटी द्वारा शैक्षणिक कैलेंडर का पालन कतई नहीं किया जाता। छात्रों के अनुसार चारों वर्ष के स्टूडेंट्स के पूरक के नतीजे अब तक घोषित नहीं किए गए हैं जबकि इसे अक्टूबर 09 में ही घोषित हो जाना था।
पूरक परीक्षा के रिजल्ट समय पर घोषित नहीं किए जाने के कारण उसी अनुपात में वार्षिक परीक्षा लंबित होती जा रही है। मामले को लेकर 8 फरवरी को प्रदेशभर के फिजियोथेरेपिस्ट स्टूडेंट्स ने कुलपति से भेंटकर अपनी समस्या से उन्हें अवगत कराया। स्टूडेंट्स ने कुलपति से आग्रह किया कि पूरक परीक्षा का परिणाम फरवरी माह के तृतीय सप्ताह तक घोषित कर अगले माह मार्च 2010 के अंत तक वार्षिक परीक्षा ली जाए। छात्रों ने बताया कि यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के समक्ष अपनी व्यथा सुनाने का यह पहला अवसर नहीं है।










