बैंक भी आए संदेह के दायरे में
रायपुर. कृषि सचिव बीएल अग्रवाल और उनके परिवार पर आयकर छापों के बाद मिले फर्जी खातों से बैंक अधिकारी भी सकते में हैं।
करोड़ों रुपए की अघोषित आय के इस मामले में कई बैंकों की भूमिका भी संदेह के दायरे में आ गई है। खरोरा के लोगों के नाम पर खोले गए दो सौ से ज्यादा फर्जी बैंक खाते यूनियन बैंक की रामसागरपारा और पंडरी ब्रांच के हैं। आयकर विभाग के निर्देश पर इन शाखाओं के अधिकारी पिछले तीन दिनों से इन सारे खातों के दस्तावेज निकालने में जुटे हैं।
आयकर विभाग ने सारे खातेदारों के नाम और एकाउंट नंबरंों की जानकारी के साथ इन दोनों ब्रांचों में धावा बोला था। अपने सामने उन्होंेने सारे रिकार्ड चेक किए और करंट बैलेंस की जानकारी लेने के बाद खातों से लेन-देन रुकवा दिया। आयकर विभाग ने सारे बैंक खातों से हुए लेन-देन की जानकारी मांगी है। सोमवार को जानकारी लेने पहुंचे भास्कर संवाददाता ने देखा कि रामसागरपारा शाखा का आधा स्टाफ इन्हीं खातों की जानकारी के प्रिंट और फोटोकापी करने में जुटा था। हर खाते का अलग रिकार्ड तैयार किया जा रहा है, जिसे आयकर विभाग को सौंपा जाएगा। पंडरी ब्रांच में भी यही
स्थिति दिखी।
बैंक के सूत्रों का कहना है कि कई और कारोबारियों ने भी अपने नौकरों के नाम पर बैंक खाते खोल रखे हैं। दो नंबर के सारे लेन-देन इन्हीं खातों से होते हैं। सालों से यह चल रहा है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में खाते फर्जी निकलेंगे, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। खुलासे के बाद खातों की जांच में जुटे अधिकारी भी मान रहे हैं कि कई ग्रामीणों के चेहरे ही इस घोटाले की चुगली करते हैं। उनका चेहरा देखकर ही आभास हो जाता है कि उनकी स्थिति लाखों रुपए कमाने की नहीं है। कुछ खाते तो 2005 के आसपास भी खोले गए थे।
अग्रवाल की संपत्ति राजसात हो: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव मंडल सदस्य संजय पराते ने कृषि सचिव बीएल अग्रवाल की
संपूर्ण संपत्ति राजसात करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आयकर विभाग के छापे में करोड़ों की संपत्ति उजागर होना पर्याप्त सबूत है। श्री अग्रवाल को गिरफ्तार किया जाए।
ढेर सारे सवाल
खातेदारों को ब्रांच में बुलाए बिना इतने सारे खाते कैसे खोल दिए गए?
कई पुराने खातों में एटीएम की सुविधा नहीं है। ऐसी स्थिति में उन खातों से पैसा कैसे निकाला जा रहा था, जांच का विषय है।
0 इन खातों से रकम नगद में निकाली जा रही थी, या चेक के रूप में। चेक किसके खाते में जा रहे थे।
0 इन खातों से बड़ी रकम का लेन-देन होने के बावजूद ब्रांच को शक क्यों नहीं हुआ।











