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Tuesday, Feb 9th, 2010, 2:23 am [IST]  

danik bhaskarनिशाने पर दागी बैंक अफसर

Bhaskar News

अम्बाला.स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का स्पेशल असिस्टेंट प्रमोद राणा तो पुलिस गिरफ्त में आ चुका है। मगर बैंक के ऐसे कुछ अधिकारी व कर्मचारी ठाठ से नौकरी कर रहे हैं। जबकि ये उन्हीं सोसायटियों के पदाधिकारी थे, जिसने लोगों की रकम ठगी। यही नहीं पुलिस ने 11 जून 2009 को जो एफआईआर दर्ज की, उसमें भी उन्हें आरोपी भी बनाया था।



पुलिस ने प्रमोद राणा के अलावा उनकी पत्नी संतोष रानी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक शाखा में मैनेजर एमएल सहगल और एसबीआई में ही कर्मचारी सहगल ही पत्नी वनीता के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था। हालांकि सहगल दंपती का तर्क रहा है कि उनका द वन खंडी और द अम्बाला दुर्गा सोसायटियों से कोई लेना-देना नहीं है।



वो सब राणा का वन-मैन शो था। उन्हें तो डमी सदस्य की तरह रखा गया था। एमएल सहगल के मुताबिक 1998 में उनका तबादला भठिंडा हो गया था। उसके बाद किसी चेक या एफडीआर में उनके साइन नहीं हैं। यही नहीं उन्होंने सोसायटी के पद से इस्तीफा राणा को दे दिया था।



जबकि निवेशकों ने पेश किए सबूत



दूसरी तरफ निवेशकों ने पुलिस के समक्ष सबूत पेश किए हैं जिसमें सहगल दंपती को सोसायटियों को पदाधिकारी बताया गया है।आरटीआई में मांगी गई सूचना में जानकारी सामने आई। जिसमें द अम्बाला दुर्गा सोसायटी की कार्यकारिणी के 28 मार्च 2006 को हुए चुनाव का जिक्र है।



जिसके मुताबिक संतोष राणा को अध्यक्ष और वनीता सहगल को उपाध्यक्ष चुना गया। वहीं 10 फरवरी 2006 को हुए द वन खंडी सोसायटी की कार्यकारिणी के चुनावों में प्रमोद सिंह राणा को प्रधान और एमएल सहगल को उपप्रधान चुनने की जानकारी है। निवेशकों का दावा है कि 13 जून व 13 जुलाई 2007 को इन चेकों पर सहगल के हस्ताक्षर हैं।



क्या सोते रहे बैंक अधिकारी:



वन खंडी और अम्बाला दुर्गा सोसायटी द्वारा निवेशकों के साथ की गई ठगी की शिकायत अक्टूबर 2008 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर को भेज दी गई थी। क्योंकि इन सोसायटियों के संचालक इस बैंक में ही कार्यरत थे। मगर बैंक अधिकारियों नेमामले में कार्रवाई ही नहीं की।




मामले एक जैसे धाराएं अलग



नवयुग सोसायटी ने भी अपने निवेशकों को ऐसे ही अंगूठा दिखाया था जैसे अब नव दुर्गा व वन खंडी सोसायटियों ने दिखाया है। तब अक्टूबर 2008 में नवयुग सोसायटी के संचालक सुधीर बंसल समेत अन्य के खिलाफ अम्बाला सिटी सदर पुलिस ने भादंसं की धारा 420, 406, 468, 470, 471 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया था।



मगर अब उसी तरह के मामले में सदर पुलिस ने अम्बाला दुर्गा सोसायटी के संचालकों के खिलाफ सिर्फ धारा 420 व 120-बी के तहत ही मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता विजय गोयल कहते हैं कि यह मामला तो नवयुग से भी ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि यहां दो सोसायटियां बनाकर ठगी की गई। गोयल आरोप लगाते हैं कि पुलिस ने जानबूझ कर केस कमजोर किया है क्योंकि उन्होंने अम्बाला दुर्गा और वन खंडी दोनों ही सोसायटियों के खिलाफ शिकायत की थी। मगर पुलिस ने एक ही सोसायटी के खिलाफ केस दर्ज किया और धाराएं भी कम लगाई।

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