पानी पर पंजाब की ना
चंडीगढ़. शहर में भाखड़ा नहर से दो लाइनों से 40 मिलियन गैलन पानी नहीं आएगा। पानी देने के लिए चीफ सेक्रेटरी पंजाब न कर चुके हैं। फाइल मुख्यमंत्री पंजाब प्रकाश सिंह बादल के पास पहुंच गई है, जहां अंतिम फैसला होना है।
चंडीगढ़ को पानी देने के लिए पिछले दिनों पंजाब के चीफ सेक्रेटरी एससी अग्रवाल के साथ प्रशासक के सलाहकार की मीटिंग हुई थी। चीफ सेक्रेटरी ने प्रशासक के सलाहकार को कहा था कि चंडीगढ़ के पास अगले 20 साल के लिए पर्याप्त पानी है। ऐसे में कजौली से भाखड़ा नहर से दो लाइनों में और 40 मिलियन गैलन पानी लाने की क्या जरूरत है। लिहाजा पंजाब भाखड़ा नहर से चंडीगढ़ को पानी देने के कतई पक्ष में नहीं है। इस फैसले की फाइल पंजाब के चीफ सेक्रेटरी ने मुख्यमंत्री को भेज दी है।
चंडीगढ़ को पानी न देने के फैसले से चंडीगढ़ में दो लाइनों से पानी लाने का प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ेगा। न ही केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से फंड रिलीज किया जाएगा। फंड रिलीज करने से पूर्व मांगी थी कंसेंट केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने प्रशासन से शहर में कजौली से भाखड़ा नहर का पानी लाने के लिए पंजाब सरकार की सहमति तीन महीने तक सब्मिट करने को कहा था। इसके बाद ही जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन के तहत 171 करोड़ के प्रोजेक्ट से 134 करोड़ का फंड को रिलीज किया जाना था।
पिछले दिनों चंडीगढ़ प्रशासक के एडवाइजर से मीटिंग हुई थी। उसमें साफ कर दिया गया था कि चंडीगढ़ में तो अगले 20 सालों के लिए पर्याप्त पानी है, ऐसे में और पानी लाने की जरूरत नहीं है। वैसे फैसला मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को लेना है। फाइल उनको भेजी जा चुकी है।
एससी अग्रवाल, चीफ सेक्रेटरी, पंजाब










