निशक्त विद्यार्थियों को एडमिशन से इनकार नहीं
उदयपुर. स्कूलों में एडमिशन का दौर चल रहा है। होशियार या पढ़ाई में औसत विद्यार्थियों को तो मनचाहे स्कूलों में प्रवेश मिल जाता है, लेकिन विशेष जरूरत वाले विद्यार्थी शिक्षा की मुख्यधारा में सहजता से शामिल नहीं हो पाते। सीबीएसई ने अपने स्कूलों को भेजे पत्र में निर्देश दिए हैं, ताकि निशक्त विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समुचित अवसर मिल सके।
मानसिक अथवा शारीरिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों (चिल्ड्रन विद स्पेशल नीड्स) को प्रवेश देने से ना नकुर करने वाले स्कूलों की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यो को भेजे पत्र में निर्देश दिए हैं कि ना केवल ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए प्रवेश दिया जाए, बल्कि यदि अभिभावक ऐसे विद्यार्थियों के लिए सहायक का आग्रह करें तो एक प्रशिक्षित व्यक्ति को ऐसे छात्र अथवा छात्रा के साथ लगाया भी जाए जो उसे क्लासरूम में सीखने की प्रक्रिया को समझने में मदद कर सके।
बोर्ड चेयरमेन व सचिव विनीत जोशी की ओर से हाल में भेजे गए पत्र में बताया गया कि सीबीएसई ने असमर्थ अथवा निशक्त विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए गाइडलाइंस साफ तौर पर दे रखी हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि कई स्कूलों द्वारा इन निर्देशों की अनदेखी की जाती है। कम सुनने या देखने वाले, साफ बोल नहीं पाना या फिर देरी से समझने वाले विद्यार्थियों को चिल्ड्रन विद स्पेशल नीड्स की श्रेणी में माना जाता है। अधिकांश स्कूल अपना रिजल्ट श्रेष्ठ बनाए रखने के लिए ऐसे निशक्त विद्यार्थियों को प्रवेश देने के इच्छुक नहीं होते, लेकिन ऐसा करना सीबीएसई के नियमों का उल्लंघन मानते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी।











